कन्नौज। दुष्कर्म का झूठा मुकदमा दर्ज कराने पर कोर्ट ने महिला को छह माह कैद और उसके घर की कुर्की कराने की सजा सुनाई है। कोर्ट ने कहा कि वादी महिला ने अधिकारों का गलत इस्तेमाल कर बेगुनाह लोगों को फंसाने, पुलिस और कोर्ट का समय बर्बाद किया है।
तिर्वा कोतवाली में 21 मई 2017 को एक महिला ने बहादुरपुर गांव निवासी अजय, उसके भाई मूलचंद्र, अरविंद और दो अज्ञात लोगों के खिलाफ दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि 10 अप्रैल 2017 को वह बहन के घर से लौट रही थी।
इस दौरान बोलेरो से आ रहे इन लोगों ने उसे घर छोड़ने का झांसा देकर साथ बैठा लिया। सुनसान जगह पर बोलेरो रोककर सभी ने उसके साथ दुष्कर्म किया। मामले की विवचेना एसआई वीरपाल ने की। इस दौरान पीड़िता ने मेडिकल परीक्षण, कोर्ट में बयान देने से इन्कार कर दिया।
सात नवंबर 2019 को पुलिस ने कोर्ट में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की। इसमें बताया कि वादी ने विवेचना में सहयोग नहीं किया। वादी का पति जेल में है। पति पर दर्ज कराई गई रिपोर्ट की रंजिश में सीधे-साधे ग्रामीणों को फंसाने और समझौते का दबाव बनाने के महिला ने झूठा मुकदमा दर्ज कराया है।
सोमवार को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने वादी महिला के घर की कुर्की के आदेश और छह माह कारावास का फैसला सुनाया। वहीं कोर्ट ने इस मामले में डीएम को पत्र भेजकर वादी महिला को प्रतिकर लाभ देने से पहले कोर्ट को सूचित करने को कहा है।