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12 रुपये कमीशन लेने में 7 साल बाद चार साल की सजा

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12 रुपये कमीशन लेने में चार साल की कैद
- 17 साल पहले सूखा राहत की चेक के भुगतान में फोटोकॉपी के दुकानदार ने किसान से लिए थे रुपये
संवाद न्यूज एजेंसी
कन्नौज। अपर सत्र न्यायाधीश (कोर्ट संख्या एक) विश्वम्भर प्रसाद ने 17 साल पहले सूखा राहत के तहत दी गई सहायता राशि के चेक से भुगतान कराने के नाम पर 12 रुपये कमीशन लेने वाले दुकानदार को चार साल की सजा सुनाई है। न्यायालय ने दोषी पर पांच हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। जुर्माना अदा न करने पर चार माह सजा और काटनी होगी।
शासकीय अधिवक्ता तरुण चंद्रा ने बताया कि साल 2005 में जिले को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। शासन की ओर से खेत के रकबे के हिसाब से सहायता राशि की चेक दिए गए। इसी क्रम में इंदरगढ़ निवासी किसान सुरेश चंद्र का भी चेक आया था। सुरेश चंद्र ने 23 जून 2005 को जिला सहकारी बैंक इंदरगढ़ के शाखा प्रबंधक सुरेश कुमार से शिकायत दर्ज कराई। इसमें बताया था कि बैंक के बाहर नेकापुर निवासी प्रभातचंद्र फोटोकॉपी की दुकान चलाता है। उसने 118 रुपये का सुरेश का बियरर चेक का भुगतान कराने के नाम पर 12 रुपये कमीशन काट लिया और 106 रुपये दे दिए। इसकी जानकारी पर बैंक के तत्कालीन प्रबंधक सुरेश कुमार ने प्रभात के खिलाफ इंदरगढ़ थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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मंगलवार को पूरे मामले की सुनवाई करने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश प्रथम विश्वम्भर प्रसाद ने प्रभात को दोषी करार दिया। प्रभात को चार साल कैद की सजा और पांच हजार रुपये का जुर्माना सुनाया।
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इनसेट
अभियुक्त के दोषमुक्त होने पर शासन की अपील पर हुई सजा
शासकीय अधिवक्ता तरुणचंद्रा ने बताया कि प्रभात चंद्र को 27 नवंबर 2019 को इस मामले में अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी कोर्ट ने दोषमुक्त कर दिया था। सूखा राहत चेक में किसानों से धन उगाही करने के अभियुक्त को दोषमुक्त करने का राज्य सरकार ने संज्ञान लिया। इसके बाद फैसले के खिलाफ कोर्ट में अपील दायर की गई। अपील मंजूर कर कोर्ट ने दोबारा सुनवाई की और सजा हुई।
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