कन्नौज के पुराने एसपी राजेश कुमार श्रीवास्तव।संवाद
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कन्नौज। एसपी रहे राजेश श्रीवास्तव को 14 दिन में ही यहां से हटाने का निर्णय यूं ही नहीं लिया गया। दरअसल बवाल रोकने में उनकी नाकामी से शासन खफा है। घटना को लेकर शासन ने एक वरिष्ठ अफसर के जरिये उनसे कुछ सवाल किए थे। इन सवालों के जवाब से शासन संतुष्ट हुआ और रात में ही इन्हें हटाने का निर्णय हो गया।
विभागीय सूत्र बताते हैं कि एसपी से सवाल किया गया था कि मवेशियों के अवशेष मंदिर में फेंके जाने के बाद डॉग स्क्वॉड को मौके पर क्यों नहीं बुलाया गया? घटना के बाद आसपास के थानों से सामंजस्य बैठाकर मौके पर अधिक पुलिस क्यों नहीं बुलाई गई? शासन को घटना की जानकारी देरी से देने को लेकर भी सवाल किया गया था, लेकिन इसका भी संतोषजनक जवाब नहीं मिला।
दो समुदाय के लोग आमने सामने न आएं इसके लिए बनाई गई रणनीति को लेकर भी सवाल हुआ। इस सबसे इतर सुबह हुई घटना के बाद दर्ज कराई गई एफआईआर को लेकर भी शासन ने सख्त नाराजगी जताई। तालग्राम थाने के उपनिरीक्षक रामप्रकाश ने आईटी एक्ट के तहत धार्मिक भावनाओं को भड़काने की कोशिश करने और इसी क्रम में हवन कुंड में मवेशी के अवशेष डाले जाने की रिपोर्ट अज्ञात पर दर्ज कराई थी। इतनी बड़ी घटना की एफआईआर आईटी एक्ट में किए जाने का जवाब भी यहां के अफसर नहीं दे पाए थे।