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काऊ मिल्क प्लांट बंद, कर्मचारी बेरोजगार

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कन्नौज/ उमर्दा। देश का इकलौता काऊ मिल्क प्लांट बजट के अभाव में बंद हो गया है। प्लांट में ताला लगने से श्रमिक और कर्मचारी बेरोजगार हो गए हैं। बड़ी संख्या में कर्मचारियों और श्रमिकों दो से तीन महीने का वेतन नहीं मिला है। इससे इनकी दिवाली फीकी रहेगी। दूध की उपलब्धता पर भी असर पड़ने लगा है।
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गो पशु पालन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2018 में बढ़नपुर वीरहार उमर्दा में 140.39 करोड़ रुपये की लागत से तैयार काऊ मिल्क प्लांट का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑनलाइन तरीके से किया था। कानपुर नगर, कन्नौज, बाराबंकी, फिरोजाबाद, आगरा, मैनपुरी, बरेली और हमीरपुर समेत 14 जनपदों में 150 दुग्ध संग्रह केंद्र स्थापित कर दूध की खरीद शुरू की गई थी। प्लांट में रोजाना एक लाख लीटर दूध से पनीर, मक्खन, घी, मट्ठा और दूध की पैकेजिंग होती थी। शासन से बजट न मिलने पर नौ अक्तूबर से प्लांट बंद है। इससे प्लांट में काम करने वाले 150 श्रमिक, दूध का परिवहन व दुग्ध संग्रह केंद्रों में काम करने वाले 500 से अधिक कर्मचारियों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया है। वहीं, प्लांट बंद होने से लखनऊ, मथुरा, कानपुर समेत कई महानगरों में यहां से दूध और दूध से बने उत्पादनों की आपूर्ति बंद हो गई।
शासन से मिलता था दूध खरीदने का पैसा और कर्मचारियों का वेतन
प्लांट के एक अधिकारी ने बताया कि एक लाख लीटर दूध की खरीद और कर्मचारियों के वेतन के लिए 60 लाख रुपये शासन से मिलते थे। दूध की बिक्री का पैसा सहकारिता विभाग अपने पास रखता है। बीते कुछ महीने से 60 लाख रुपये जारी करने में कटौती होती रही। इस वजह से दूध की खरीद कम की जाती रही। बीते सितंबर तक दूध की खरीद 20,000 लीटर रह गई थी। इसके भुगतान के लिए पैसा नहीं मिला तो प्लांट बंद करना पड़ा।
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वर्जन
प्लांट संचालित होने में प्रतिमाह 60 लाख का खर्च आता है। शासन से बजट न मिलने पर प्लांट बंद कर दिया गया है। बजट की मांग की गई है।
अनिल कुमार चौधरी, प्रबंधक, काऊ मिल्क प्लांट
प्लांट बंद होने की जानकारी मिली है। प्रादेशिक कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन लखनऊ को पत्र लिखकर प्लांट शुरू करवाया जाएगा।
शुभ्रांत शुक्ल, डीएम
प्लांट बंद होने से श्रमिक चिंतित
काऊ मिल्क प्लांट बंद होने से श्रमिक चिंतित हैं। स्थानीय श्रमिक विनय कुमार ने बताया कि तीन माह से उन्हें वेतन नहीं मिला है। प्लांट बंद होने से परिवार के सामने आर्थिक संकट आ गया। वहीं, वीरहार निवासी रामकुमार का कहना है कि अधिकारियों से बात की है। उनका कहना है कि प्लांट जल्द शुरू कराने का प्रयास किया जाएगा।
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