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बीमारियों से लड़कर गंदगी के बीच भविष्य संवारने की चुनौती

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कन्नौज। जिले के अधिकांश प्राथमिक विद्यालयों के आसपास गंदगी का अंबार है। नौनिहाल इसी गंदगी और बदबू के बीच पढ़ाई करने के लिए विवश हैं। बरसात में गंदगी से पनपने वाली बीमारियों से जान का खतरा बना हुआ है।
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बरसात में परिषदीय स्कूलों की कक्षाओं तक कीचड़ की सड़ांध और बदबू नौनिहालों को विचलित करती है। कई स्कूलों में चहारदिवारी नहीं है। कुछ स्कूलों के गेट पर मवेशी बंधे है। ऐसे में मवेशियों के रेंकने से शिक्षा प्रभावित हो रही है। बारिश में संवारी रोगों से निपटने के लिए एक जुलाई से 31 जुलाई तक चलने वाला अभियान भी स्कूलों तक नहीं पहुंचा। कागजों में ही सिमट गया। स्कूलों की हकीकत बयां करती एक रिपोर्ट-
तबेले में तब्दील पाठशाला
जलालाबाद ब्लाक के उच्च प्राथमिक विद्यालय जसपुरा सरैया किसी तबेले के कम नहीं है। विद्यालय के मुख्य गेट के पास स्थानीय पशु पालकों ने मवेशियों को बांध रखा है। कई बार बच्चे गोबर में गिरकर चोटहिल हो चुके हैं। बच्चों को अंदर जाने में डर लगता है।
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सड़क पर नहीं मिट्टी भराव, बारिश में फिसलन
कंपोजिट विद्यालय रजलामऊ के गेट के पास सड़क पर बारिश से पहले मिट्टी डालकर भराव नहीं कराया गया है। इससे बारिश में जलभराव के साथ फिसलन बनी हुई है। छात्रों को संभलकर आना-जाना पड़ता है।
तालग्राम ब्लाक क्षेत्र के पूर्व माध्यमिक विद्यालय सकहरनी के मुख्य गेट के बाहर बारिश का गंदा पानी भरा हुआ है। छात्र-छात्राओं को किसी तरह विद्यालय के अंदर जाकर पढ़ाई करनी पड़ती है। बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।
खिड़कियों से आती है बदबू
सदर ब्लाक के उच्च माध्यमिक विद्यालय जसौली में चहारदिवारी नहीं बनी है। विद्यालय के पीछे तालाब में गंदा पानी भरा हुआ है। इसके अलावा पास में बेहद गंदगी है। खिड़कियों के अंदर बदबू जाने से छात्रों को सांस लेना दूभर है।
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