छिबरामऊ। कोरोना वायरस को लेकर एक बार फिर शासन और प्रशासन अलर्ट मोड़ पर आ गया है। अगर हालात बिगड़े तो नगर में आधुनिक सुविधा युक्त सौ शय्या अस्पताल के भरोसे न रहें। इस महामारी से बचाव के लिए स्वयं तैयार रहें।
ग्राम दिलू नगला स्थित सौ शय्या अस्पताल में स्पेशलिस्ट चिकित्सकों का टोटा है। कई सालों से यहां एमडी मेडिसन व एमडी चेस्ट की नियुक्ति नहीं हो सकी है। एकमात्र एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ. विपिन सचान की तैनाती है। हालांकि कोरोना की दूसरी लहर की तरह इस बार ऑक्सीजन की मारामारी नहीं झेलनी पड़ेगी। अस्पताल परिसर में ऑक्सीजन प्लांट की स्थापना कराई जा चुकी है। अस्पताल के 70 बेडों पर प्लांट से सीधे ऑक्सीजन सप्लाई की व्यवस्था है। आपात स्थितियों के लिए यहां मात्र एक ही वैंटीलेटर हैं, लेकिन इसके संचालन के लिए प्रशिक्षित कर्मी नहीं है।
बयान
प्रभारी सीएमएस डॉ. मनीष तिवारी ने बताया कि कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए पर्याप्त मात्रा में दवाओं का स्टॉक ही है। अन्य सुविधाएं बेहतर न होने से गंभीर मरीजों को मजबूरन रेफर करना पड़ सकता है।
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चार माह से नहीं हो रहा वैक्सीनेशन
प्रभारी सीएमएस डॉ. मनीष तिवारी ने बताया कि वैक्सीन न मिलने के कारण पिछले चार महीनों से अस्पताल में कोविड वैक्सीनेशन का बंद है। इस समय अस्पताल में मात्र कोविड जांच की व्यवस्था है। वहीं सीएचसी प्रभारी डॉ. राहुल मिश्रा ने बताया कि छह महीने से कोविड वैक्सीन जिला मुख्यालय पर ही नहीं भेजी गई है। अभी तक वैक्सीन के पुराने स्टॉक से काम चलाया जा रहा था। अब वह भी खत्म हो चुका है, जिसके चलते पिछले छह दिनों से वैक्सीनेशन कार्य पूरी तरह से ठप है।