कन्नौज। पालकों को पशुओं के इलाज के लिए दूरदराज के अस्पतालों में ले जाने के लिए परेशान न होना पड़े। इसके लिए गुरसहायगंज में 69.11 लाख रुपये की लागत से राजकीय पशु अस्पताल निर्माण कराया गया, लेकिन अस्पताल का भवन में हैंडओवर से पहले ही दरारें आ गईं हैं। इससे साफ जाहिर है कि भवन निर्माण में मानकों को ताक पर रखकर कार्य कराया गया है। वहीं दूसरी ओर कार्यदायी संस्था की ओर से भवन को हैंडओवर करने के लिए विभाग पर दबाव बनाया जा रहा है।
गुरसहायगंज के मोहल्ला गांधी नगर में राजकीय पशु अस्पताल निर्माण को अनुमति मिली। पशुपालन विभाग की ओर से यूपीसीएलडीएफ कार्यदायी सस्था को निर्माण के लिए नामित किया गया। पशु अस्पताल के लिए 69.11 लाख रुपये बजट पास हुआ। इसके बाद 40.17 लाख रुपये अवमुक्त कर दिए गए। इसमें अस्पताल भवन, इंडोर वार्ड, केटर क्रस, शौचालय, हैंडपंप, बाउंड्रीवॉल आदि का निर्माण कराया जाना था। 14 दिसंबर 2022 को निर्माण कार्य शुरू हो गया और मार्च 2023 तक पूर्ण होना था। जून 2024 में अस्पताल बनकर तैयार हो गया, लेकिन हैंडओवर होने से पहले ही अस्पताल के लिंटर के नीचे दरारें आ गई हैं। दरवाजे और खिड़की के ऊपर बने छज्जे भी टूटने लगे हैं। इससे साफ जाहिर है कि भवन निर्माण में घटिया सामग्री का प्रयोग किया गया है, जिस कारण हैंडओवर से पहले ही भवन में दरारें आ गई हैं। ब्लाॅक नोडल अधिकारी डाॅ. विकराल सिंह ने निर्माणाधीन अस्पताल की हकीकत देखी तो वह दंग रह गए। निर्माण कार्य तो पूरा नहीं ही था। इसके अलावा घटिया सामग्री से निर्माण के चलते भवन में दरारें नजर आईं। इस पर कार्यदायी संस्था के जेई को सुधार करने और अधूरे कार्य को पूरा कराने के दिशा-निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि भवन निर्माण में मानकों का ध्यान नहीं रखा गया। कार्यदायी संस्था हैंडओवर का दबाव बना रही है।
इनसेट
शौचालय टैंक पर डाल दिए गए दो पत्थर
पशु अस्पताल में शौचालय और उसका टैंक बनाया गया। टैंक को भी सही से बंद नहीं किया गया और उसके ऊपर दो पत्थर डाल दिए गए हैं। इसके अलावा अभी तक अस्पताल की बाउंड्रीवॉल भी नहीं बनाई गई है।