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Kannauj News: मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए 50 से 90 फीसदी अनुदान

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संवाद न्यूज एजेंसी
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तिर्वा। बाजरा समेत मोटे अनाज की फसल को बढ़ावा देने और किसानों को जागरूक करने के लिए योजनाओं के माध्यम से मोटे अनाज के बीजों पर अनुदान मिल रहा है। बाजरा के हाईब्रिड बीज की खरीद पर 50 से 90 प्रतिशत तक अनुदान का प्रावधान है।



तिर्वा के कृषि बीज गोदाम प्रभारी आशीष सिंह ने बताया कि मोटे अनाज की पैदावार को बढ़ाने के लिए सरकार किसानों को बीज पर अनुदान दे रही है। उन्होंने बताया कि बाजरा के हाइब्रिड बीज गोदाम में उपलब्ध हैं। जिसकी खरीद करने पर सरकार 50 फीसदी का अनुदान दे रही है। मक्का पर 90 फीसदी, उर्द व मूंग के बीज पर 50 प्रतिशत का अनुदान दिया जा रहा है। जिप्सम पर भी 75 फीसदी अनुदान दिया जा रहा है। कृषि बीज गोदाम प्रभारी ने बताया कि तिर्वा तहसील क्षेत्र में करीब 23 हजार हेक्टेयर संचित भूमि में पिछले वर्ष किसानों ने एक हेक्टेयर में बाजरा की पैदावार की थी। उन्होंने बताया कि पैदावार की भागेदारी बढ़ाने के लिए मोटे बीज पर अनुदान दिया जा रहा है।
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कम लागत में खेती, मुनाफा भी अच्छा
बाजरे की खेती में उर्वरकों की जरूरत नहीं पड़ती है। इसकी फसल में कीड़े-मकोड़े नहीं लगते हैं। नाम मात्र का पानी लगने से सिंचाई में लगने वाले श्रम व संसाधन की भी बचत होती है। अधिकांश बाजरे की किस्में भंडारण में भी आसान हैं। बाजार में बाजरे का करीब 2100 से 2400 रुपये क्विंटल का भाव रहता है। जो अन्य फसलों से कम लागत में पैदावार होता है। उन्होंने बताया कि किसान बाजरे की फसल कर अपनी आय को बढ़ा सकता है।
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पोषक तत्वों का खजाना है बाजरा
बाजरे में गेहूं और चावल की तुलना में तीन से पांच गुना ज्यादा पोषक तत्व होते हैं। इसमें ज्यादा खनिज, विटामिन, खाने के लिए रेशे और अन्य पोषक तत्व मिलते हैं। लसलसापन नहीं होता। इससे अम्ल नहीं बन पाता। लिहाजा सुपाच्य होता है। इसमें उपलब्ध ग्लूकोज धीरे-धीरे निकलता है। यह मधुमेह (डायबिटीज) पीड़ितों के लिए भी मुफीद है। बाजरे में लोहा, कैल्शियम, जस्ता, मैग्नीशियम और पोटाशियम जैसे तत्व भरपूर मात्रा में होते हैं। साथ ही काफी मात्रा में जरूरी फाइबर (रेशा) मिलता है। बाजरे में पोलिफेनोल्स, टेनिल्स, फाइटोस्टेरोल्स तथा एंटीऑक्सिडैन्टस प्रचुर मात्रा में मिलते हैं। यही वजह है कि सरकार ने इसे न्यूट्री सीरियल्स घटक की फसलों में शामिल किया है।
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