कन्नौज। चार साल पहले 13 वर्षीय किशोरी से दुष्कर्म के मामले में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए उसे 30 साल कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही एक लाख पांच हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। इसी मामले में कोर्ट ने दोषी के पिता को दलित उत्पीड़न का दोषी पाते हुए तीन साल कारावास की सजा सुनाई है। 3500 रुपये जुर्माना लगाया है। जबकि भाई को साक्ष्यों के अभाव में दोष मुक्त करार दिया है।
विशेष लोक अभियोजक किशोर दोहरे व शासकीय अधिवक्ता नवीन दुबे ने बताया कि मामला सदर कोतवाली क्षेत्र के एक गांव का है। एक महिला ने गांव के ही रहने वाले करन, भाई अर्जुन व पिता मोतीलाल के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। कहा था कि करन की बाइक से 10 नवंबर 2019 को किशोरी की मां घायल हो गई थी। तब करन से महिला को इलाज कराने के लिए कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती कराया था। तब से पिता-पुत्रों का घर में आनाजाना शुरू हो गया। कहा कि पिता-पुत्रों के साथ साझा में एक नया ट्रैक्टर खरीदा था। खेत गिरवी रखकर, फसल और जेवर बेचकर ढाई लाख रुपये दिए थे। कहा कि कुछ दिन बाद पता चला कि जो नया ट्रैक्टर खरीदा गया है धोखाधड़ी कर अपने नाम करवा लिया। घर आने जाने के दौरान करन ने 13 वर्षीय पुत्री पर नीयत खराब हो गई। पुत्री को प्रेमजाल में फंसा लिया। पांच अगस्त 2020 को युवक ने पुत्री के साथ दुष्कर्म किया। कहा कि जब युवक के घर शिकायत की तो भाई व पिता ने अभद्रता की। पुत्री के साथ दुष्कर्म होने की वजह से वह गर्भवती हो गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर विवेचना कर आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किए। मंगलवार को साक्ष्यों व गवाहों के आधार पर विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट की जज अलका यादव ने करन को 30 साल कारावास की सजा सुनाई।