कन्नौज। नौ साल पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का पुतला फूंकने के आरोप में एमपी-एमएलए कोर्ट ने सांसद सुब्रत पाठक समेत 10 लोगों को बरी कर दिया है। फैसला पक्ष में आते ही सांसद समर्थकों व भाजपाइयों में खुशी की लहर दौड़ गई। एडीजे फस्ट विशंभर प्रसाद ने फैसला सुनाया।
मामला लोकसभा चुनाव 2014 के बाद का है। तब भाजपा प्रत्याशी रहे सुब्रत पाठक चुनाव हारे थे। तत्कालीन सरायमीरा चौकी प्रभारी होरीलाल रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के मुताबिक 20 मई 2014 को हेड कांस्टेबल राणा प्रसाद व शिव सिंह के साथ गश्त पर थे। तभी जानकारी मिली कि तिर्वा क्रॉसिंग पर 2014 के लोकसभा पराजित प्रत्याशी सुब्रत पाठक समर्थकों के साथ यातायात रोक कर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। सुब्रत पाठक ने साथियों के साथ मिलकर मुख्यमंत्री का पुतला जला रहे थे। इस मामले में अब नौ साल बाद शुक्रवार को एमपी-एमएलए कोर्ट के जज विशंभर प्रसाद ने सांसद सुब्रत पाठक को बरी कर दिया। उनके साथ आरोपी बनाए गए उनके समर्थकों सौरव कटियार, विशाल शुक्ला, निहाल, प्रभात बाजपेई, श्याम जी मिश्रा, विक्रम त्रिपाठी, दीपू, निरंजन, छोटू यादव को भी दोष मुक्त करार दिया। इस मामले में सांसद पक्ष की ओर से पैरवी करने वाले अधिवक्ता अनूप दुबे ने बताया कि यह मुकदमा पूरी तरह से निराधार था। सत्ता पक्ष के दबाव में पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज किया था। जो भी आरोप लगाया गया, कोर्ट में पुलिस उसे साबित नहीं कर पाई। जिस पुतला को जलाने की बात कही गई पुलिस उसे सुबूत के तौर पर पेश नहीं कर पाई।