अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में बुधवार को अमर उजाला कार्यालय में सम्मान समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें समाचार पत्र वितरक (हमराही) अपने परिवार के साथ शामिल हुए। कार्यक्रम में हमराही परिवार की महिलाओं को सम्मानित किया गया। इस दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए, जिसमें हमराही परिवारों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। बच्चों ने भी अपनी प्रतिभा का खूब प्रदर्शन किया। सभी बेहद खुश नजर आए।
आयोजन के दौरान हमराही परिवार के किसी बच्चे ने गीत गुनगुनाया तो किसी ने कविता पाठ किया। कुछ बच्चों ने फिल्मी संगीत की धुनों पर डांस भी किया। सभी ने अपनी-अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया, जिसे उपस्थित लोगों ने सराहते हुए बच्चों का उत्साहवर्धन किया। सभी उत्साहित नजर आए। जबकि, परिवार की महिलाओं ने अपने-अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने बताया कि बारिश हो या जाड़ा, हर मौसम में उनके परिवार के सदस्य लोगों तक अखबार पहुंचाने का काम पूरी जिम्मेदारी के साथ करते हैं। इसमें घर की महिलाएं उनका पूरा सहयोग करती हैं। इसके लिए उन्हें भी सुबह जल्दी जागना पड़ता है। आयोजन के दौरान सभी को उपहार भी भेंट किए गए।
इस मौके पर पंकज राय, दीपक साहू समेत हमराही परिवार की रागिनी साहू, नर्मदा साहू, सुमन, कुनाल साहू, अनीता, रोहित, आरती साहू, नैंसी, शबाना, पूजा साहू, कल्पना साहू, दिनेश, मोनिका साहू, शिवानी कुशवाहा, अनुराधा सविता, राज शाक्या, दीपक, सपना साहू, रवि, संध्या महाजन, पूजा राय, जया गुप्ता, मेनका गुप्ता, वैशाली, कमलेश, सोनाली ओमहरे, मीनू, धर्मेंद्र साहू, महक साहू, पूनम दुबे, संगीता साहू, रामकुमारी चक्रवर्ती आदि मौजूद रहीं।
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साझा किए अनुभव...
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पिताजी के पैर में चोट लगी हुई थी और पूरी रात वह दर्द से कराहते रहे। लेकिन, सुबह होते ही अखबार बांटने के लिए चले गए। मैंने उन्हें रोकने की कोशिश की तो उन्होंने कहा कि लोगों तक अखबार पहुंचाना बड़ी जिम्मेदारी होती है और चोट की परवाह किए बगैर वे अखबार बांटने के लिए चले गए। - नैंसी
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अखबार बांटने जाने के लिए हमराही परिवारों के पुरुष सदस्यों को सुबह जल्दी जागना पड़ता है। लेकिन, परिवार की महिलाओं को उनसे पहले उठना पड़ता है। यह क्रम साल भर हर मौसम में बना रहता है। फिर चाहे तबीयत ही खराब क्यों न हो। रूटीन ऐसा बन गया है कि अब तो अपने आप नींद खुल जाती है। - रागिनी साहू
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कंपकंपाने वाली सर्दी हो या मूसलाधार बारिश, समाचार पत्र वितरक हर मौसम की दुश्वारी को झेलते हुए अपने काम में जुटे रहते हैं। बारिश में तो वे अक्सर भीग जाते हैं और घंटों गीले कपड़े पहने हुए अपने काम में जुटे रहते हैं। लेकिन, अखबार को गीला नहीं होने देते हैं। वे हर हालत में पाठकों तक सुरक्षित अखबार पहुंचा देते हैं। - शबाना
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अखबार बांटने का काम बेहद जिम्मेदारीपूर्ण होता है। इसमें समय का पालन करना पड़ता है। इसमें किसी भी दशा में हीलाहवाली नहीं की जा सकती है। अक्सर हमराही परिवार के पुरुष सदस्य बीमार होने के बाद भी अखबार देने जाते हैं। कोरोनाकाल में भी उन्होंने अपनी जिम्मेदारी का पूरी निष्ठा के साथ पालन किया था। - अनुराधा सविता