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संगीता ने बताई आपबीती: प्लेटफार्म पर गिर पड़ी, कपड़े खून से सने... बच्चे की किलकारी सुन सब कुछ भूल गई

Fri, 07 Apr 2023 12:08 PM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, झांसी

सार

वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी स्टेशन पर गर्भवती महिला संगीता ने बच्चे को जन्म दिया। वह पति के साथ अपने मध्यप्रदेश के दमोह जिले के मोहरा गांव जा रही थी। रास्ते में प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। डॉक्टरों की टीम ने प्लेटफार्म पर ही मेरा प्रसव कराया। 
 
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नवजात के साथ महिला - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मैं दर्द से पूरी तरह से टूट गई थी। ट्रेन में ग्वालियर से झांसी तक 100 किमी का सफर बमुश्किल पूरा किया। झांसी में प्लेटफार्म नंबर तीन पर उतरते ही बेसुध होकर गिर पड़ी। सारे कपड़े खून से सन गए थे। पति ने आसपास लोगों से मदद मांगी और 20 मिनट में आई डॉक्टरों की टीम ने प्लेटफार्म पर ही मेरा प्रसव करा दिया। 
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अपने बच्चे की किलकारी सुनकर और उसको देखकर सारे दर्द दूर हो गए। मैं इसे ताउम्र नहीं भूल पाऊंगी। कुछ यही कहना है बुधवार को झांसी के रेलवे स्टेशन पर बच्चे को जन्म देने वाली दमोह की संगीता का। खून की कमी होने के चलते संगीता मेडिकल कॉलेज में भर्ती है। अमर उजाला से बातचीत में उन्होंने कहा कि लोगों की मदद न मिलती तो पता नहीं क्या होता। मेडिकल कॉलेज में संगीता और उनका बच्चा दोनों सुरक्षित हैं।

संगीता बताती हैं कि वे मूल रूप से मध्यप्रदेश के दमोह जिले के मोहरा गांव की रहने वाली हैं। उनके पति राघवेंद्र राजपूत गुड़गांव के सेक्टर 51 में एक प्राइवेट कॉलोनी में सिक्योरिटी गार्ड हैं। एक साल पहले ही उनकी शादी हुई है। संगीता बताती हैं कि डॉक्टर ने 20 अप्रैल को डिलीवरी तारीख बताई थी। गुड़गांव में हम पति-पत्नी अकेले रहते हैं, तो सोचा कि घर पर ही डिलीवरी कराएंगे। 
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चार अप्रैल को वह लोग दमोह जाने के लिए दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से एमपी संपर्क क्रांति के (एस-5) कोच में बैठे। संगीता का कहना है उस समय तक उसे कोई दिक्कत नहीं थी। बिना किसी सहारे के वह स्टेशन तक पहुंची और ट्रेन में बैठी। सफर काफी खुशनुमा था। संगीता का कहना है ट्रेन जब आगरा स्टेशन को छोड़कर आगे निकली तो उनका जी-मचलना शुरू हुआ। 

आंखों के सामने अंधेरा छा रहा था, दर्द से चीख निकल रही थी- संगीता

उसने पति राघवेंद्र को बताया, तो उन्होंने सामान्य बात कहकर पानी दे दिया। गाड़ी जैसे-जैसे आगे बढ़ने लगी उसकी यह परेशानी दर्द में तब्दील होने लगी। संगीता कहती हैं कि उस दर्द को बताना मुश्किल है। आंखों के सामने अंधेरा छा रहा था। दर्द इतना अधिक था कि उनकी चीख निकल रही थी।

पति बोला - वेंडर के ट्वीट ने बचा ली जिंदगी
संगीता का हाल देखकर राघवेंद्र भी घबरा उठा। राघवेंद्र का कहना है कि बोगी में मौजूद लोगों ने ढांढस बंधाया और झांसी स्टेशन पर उतर जाने को कहा। झांसी में पत्नी को लेकर नीचे उतर गया। यहां संगीता को ब्लीडिंग शुरू हो गई। उसके कपड़े खून से सन गए। यह देखकर डर गया। पास में ज्यादा पैसे भी नहीं थे। तभी फ्रूट जूस कार्नर चलाने वाला एक वेंडर उनके लिए देवदूत बनकर सामने आया। उसने राघवेंद्र का पीएनआर नंबर लेकर तुरंत रेलवे को ट्वीट करके मामले की जानकारी दी। 

पति बोला - वेंडर के ट्वीट ने बचा ली जिंदगी
संगीता का हाल देखकर राघवेंद्र भी घबरा उठा। राघवेंद्र का कहना है कि बोगी में मौजूद लोगों ने ढांढस बंधाया और झांसी स्टेशन पर उतर जाने को कहा। झांसी में पत्नी को लेकर नीचे उतर गया। यहां संगीता को ब्लीडिंग शुरू हो गई। उसके कपड़े खून से सन गए। यह देखकर डर गया। पास में ज्यादा पैसे भी नहीं थे। तभी फ्रूट जूस कार्नर चलाने वाला एक वेंडर उनके लिए देवदूत बनकर सामने आया। उसने राघवेंद्र का पीएनआर नंबर लेकर तुरंत रेलवे को ट्वीट करके मामले की जानकारी दी। 

 
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आधे घंटे के भीतर महिला डॉक्टर स्टाफ समेत मौके पर पहुंच गई। संगीता की हालत अस्पताल ले जाने लायक नहीं थी। डॉक्टर ने प्लेटफार्म पर ही प्रसव कराने का निर्णय लिया। आसपास के दुकानदारों ने चादर एवं कंबल के सहारे अस्थायी दीवार बनाई। थोड़ी देर में संगीता ने बच्चे को जन्म दे दिया। राघवेंद्र का कहना है कि सभी ने अपनी तरफ से भरपूर मदद की लेकिन, किसी ने पैसे नहीं मांगे। वहां मौजूद रेल स्टाफ ने अपने पैसे से मिठाई बंटवाई।
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