फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Jhansi News: मुखबिर योजना धड़ाम, नहीं लग पा रही कोख के कातिलों पर लगाम

विज्ञापन
विज्ञापन
झांसी। जिले में मुखबिर योजना पूरी तरह धड़ाम हो चुकी है। पिछले छह सालों में किसी भी एक व्यक्ति ने प्रशासन या फिर स्वास्थ्य विभाग को भ्रूण के लिंग परीक्षण करने वाले अल्ट्रासाउंड केंद्रों की जानकारी नहीं दी है। जबकि, कई जगहों पर लिंग परीक्षण का धंधा धड़ल्ले से चल रहा है। मगर स्वास्थ्य विभाग पिछले एक दशक में इस रैकेट में शामिल किसी भी केंद्र का भंडाफोड़ नहीं कर सका है। जबकि, हरियाणा और मध्य प्रदेश से आने वाली टीमें झांसी में छापेमारी करके इसका खुलासा कर चुकी हैं।
विज्ञापन

झांसी में करीब 70 अल्ट्रासाउंड सेंटर हैं। बताया गया कि इनमें एक दर्जन से अधिक सेंटरों की अल्ट्रासाउंड मशीन में ट्रैकर डिवाइस नहीं लगी है। जबकि, वर्ष 2015-16 में तत्कालीन डीएम ने पहल करते हुए सभी सेंटरों पर ये डिवाइस लगाने के निर्देश दिए थे। उनके स्थानांतरण के बाद कई सेंटरों ने ये डिवाइस नहीं लगाई। शहर के कुछ अल्ट्रासाउंड सेंटर शासनादेश में डिवाइस लगाने के आदेश का उल्लेख न होने का हवाला देकर इससे बच रहे हैं। मगर कई सेंटर ऐसे हैं, जिन्होंने इस पहल का समर्थन किया और डिवाइस लगवा भी ली। सूत्रों ने बताया कि मेडिकल कॉलेज के आसपास बने कई अल्ट्रासाउंड सेंटर पर भ्रूण का लिंग परीक्षण किया जा रहा है। इसके लिए सेंटर आठ से दस हजार रुपये वसूलते हैं। मगर अब तक किसी भी सेंटर पर कार्रवाई तो दूर, शक के आधार पर छापेमारी तक झांसी के अफसरों ने नहीं की है। सेंटरों पर जाकर कभी जांच पड़ताल नहीं की जाती है।

क्या है मुखबिर योजना
शासन ने वर्ष 2017 में प्रदेश में घटते बाल लिंगानुपात पर गंभीर चिंता जताते हुए मुखबिर योजना शुरू की थी। योजना के तहत लिंग परीक्षण कराकर भ्रूण की हत्या के अवैध कार्य में लिप्त व्यक्तियों, केंद्रों, संस्थाओं की गोपनीय रूप से सूचना प्राप्त कर विशेष ऑपरेशन के जरिए पकड़ना है। इसके लिए अलग-अलग किस्तों में मुखबिर को 60 हजार, मिथ्या ग्राहक को एक लाख, मिथ्या ग्राहक सहायक को 40 हजार की राशि पुरस्कार स्वरूप मिलती है। योजना के तहत डीएम या फिर सीएमओ को सूचना देनी पड़ती है। सूचना देने वाले का नाम आदि गोपनीय रखा जाता है।
विज्ञापन


दूसरे राज्यों की टीमों ने कई बार मारे छापे
नवंबर 2019 में हरियाणा पुलिस ने झांसी के एक अल्ट्रासाउंड सेंटर से युवक को दबोच लिया था। पुलिस अधिकारियों का कहना था कि हरियाणा में लिंग परीक्षण का मामला सामने आया था। पूछताछ में पता चला कि ये लिंग परीक्षण कराने में झांसी के अल्ट्रासाउंड सेंटर के कर्मचारी की भूमिका है। इस पर टीम युवक को अपने साथ ले गई थी।

- जनवरी 2020 में ग्वालियर की पिंक सेल टीम ने झांसी में छापा मारा था। इसमें डिप्टी कलेक्टर दीपशिखा भगत भी शामिल थीं। उन्होंने बताया था कि ग्वालियर जिला प्रशासन को शिकायत मिल रही थी कि वहां की महिलाओं को झांसी लाकर भ्रूण का लिंग परीक्षण किया जाता है। आंगनबाड़ी सहायिका को ग्राहक बनाकर भेजने के बाद इसका खुलासा हुआ था।

कब-कब कुत्तों का निवाला बने भ्रूण
- पांच दिसंबर 2020 : एरच के ग्राम बेना सुरवई में नवजात बच्ची को कपड़े में सड़क पर फेंका था। उसका रोना सुनकर लोगों ने उसे उठाया। मेडिकल कॉलेज में बच्ची ने दम तोड़ दिया था।
छह फरवरी 2021: ललितपुर के जखौरा के ग्राम पुनियांखेरा में गेहूं के खेत में कन्या भ्रूण मिला था। इससे दो वर्ष पहले यहां मोहल्ला सदनशाह चौराहे के नहर में एक कन्या भ्रूण मिला था।

- 29 नवंबर 2021 : नवाबाद क्षेत्र की मंडी पुलिस चौकी के पास कोई पॉलिथीन में तीन कन्या भ्रूण कूड़ेदान के पास फेंक गया था।
- 25 अगस्त 2022 : मोंठ थाना क्षेत्र के अशोक नगर में नाली में छह माह का कन्या भ्रूण मिला था। कोई रात के अंधेरे में फेंक गया था।
- 12 नवंबर 2022 : वीरांगना नगर में सात-आठ माह की बच्ची को रुई में लपेटकर फेंका गया था। लोगों ने शव को कुत्तों के मुंह से छुड़ाकर पुलिस को जानकारी दी थी।

वर्जन..
मुखबिर योजना के तहत अगर कोई सूचना देता है तो उसकी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है। अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर लगी मशीनों की जांच कराई जाएगी। - डॉ. सुधाकर पांडेय, सीएमओ।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें