झांसी। कुदरत की बेरुखी बुंदेलखंड के किसानों पर भारी पड़ रही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि पिछले पांच सालों के दरम्यान क्षेत्र के सातों जनपदों में फसल खराब होने से 501 किसान अपनी जान गवां चुके हैं। इनमें से अधिकांश की जान खेत में खराब फसल को देखकर सदमे से गई है। जबकि नुकसान से दुखी होकर मौत को गले लगाने वाले किसानों की संख्या भी काफी है।
रबी की फसल पककर तैयार है। कटाई भी शुरू हो चुकी है। लेकिन, ऐन वक्त पर कुदरत ने तल्ख रुख अपना लिया है। बीते तीन-चार दिनों से बारिश और ओलावृष्टि जारी है। इससे कई इलाकों में खड़ी फसल खेतों में बिछ गई है। खलिहानों में रखी कटी फसल भी भीग गई है। किसानों को अपनी मेहतन और लागत बर्बाद होती नजर आ रही है। यह स्थिति पहली बार नहीं बनी है, बल्कि पिछले 10 सालों से किसान इन्हीं हालातों से दो-चार होते आ रहे हैं। पहले सूखा किसानों को बर्बादी का मंजर दिखाता रहा और उसके बाद अब असमय होने वाली बारिश और ओलावृष्टि किसानों के लिए संकट बनी हुई है।
मौसम की यह बेरुखी अब बेबस किसानों की जान पर भारी पड़ रही है। पिछले पांच सालों (सन 2018 से अब तक) के दरम्यान बुंदेलखंड के सातों जनपदों में 501 किसान अपनी जान गवां चुके हैं। इनमें से 276 किसानों की जान खेत पर खड़ी फसल को खराब होते देखने के बाद सदमे से गई, जबकि 225 किसानों ने आत्महत्या कर अपनी जान दे दी। हालांकि, प्रशासन की ओर से इसकी पुष्टि नहीं की गई, परंतु मृतकों के परिजनों ने अपनी इस पीड़ा को जाहिर किया।
केस-1
ठाकुरदास ने विषाक्त खाकर दे दी थी जान
झांसी। गुरसराय के सरसेड़ा गांव निवासी किसान ठाकुरदास (50) ने मसूर की बुवाई की थी। लेकिन, उम्मीद के मुताबिक फसल नहीं हुई थी। इससे वह परेशान रहने लगा था। इसी परेशानी में उसने विषाक्त का सेवन कर लिया था। 16 मार्च की रात उसने मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया था। परिजनों ने बताया था कि ठाकुरदास ने कर्ज भी ले रखा था।
केस-2
गेहूं पीला पड़ा तो दे दी जान
झांसी। बड़ागांव के हाजीपुरा गांव निवासी रामसेवक अहिरवार (60) छोटे काश्तकार थे। उन्होंने 10 बीघा में गेहूं बाेया था। जनवरी माह के अंत में हुई बारिश की वजह से उसकी फसल पीली पड़ गई थी। इससे वह बुरी तरह से परेशान हो गया था। इसी परेशानी में उसने जहर का सेवन का सेवन कर लिया था। जानकारी होने पर परिजन उसे मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
केस-3
बुजुर्ग किसान ने लगा ली थी फांसी
झांसी। रक्सा क्षेत्र के ग्राम देवगढ़ के किसान बैजनाथ रजक (83) ने पिछले साल सितंबर माह में खेत पर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। बेटे बलवीर ने बताया था कि पिता ने 10 बीघा में मूंग की फसल बोई थी, लेकिन बारिश न होने से फसल खराब हो गई थी। इससे परेशान होकर उसने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी।
केस-4
फसल खराब होने के तनाव में दी जान
झांसी। गुरसराय निवासी किसान शांतनु (35) ने 10 एकड़ जमीन पर मटर की फसल बोई थी। लेकिन, पैदावार उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई। इससे वह परेशान रहने लगा था। परिजनों ने बताया कि रविवार को शांतनु खेत पर गया था। वहां से लौटते समय सल्फास की गोलियां खाली थीं। हालत बिगड़ने पर परिजन मेडिकल कॉलेज लेकर आए थे। यहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी।
कहां कितने किसानों की गई जान...
जनपद सदमे से आत्महत्या
झांसी 37 29
जालौन 32 27
ललितपुर 41 31
बांदा 38 32
महोबा 41 34
हमीरपुर 44 33
चित्रकूट 43 39