कोरोनाकाल में गंभीर रोगियों की जान बचाने के लिए मेडिकल कॉलेज को मिले थे 94 वेंटिलेटर
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। कोरोना महामारी में गंभीर रोगियों की जान बचाने के लिए पीएम केयर्स फंड से रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज को 94 वेंटिलेटर मिले थे। इनमें से अधिकांश वेंटिलेटर तालों में बंद होने के कारण धूल फांक रहे हैं। कई वेंटिलेटर खराब हो गए हैं, जिन्हें अलग-अलग जगह तालों में बंद करके रखा गया है।
कोरोना महामारी के दौरान इसकी चपेट में आने वाले रोगियों को अस्पताल में भर्ती होना पड़ता था। इससे न सिर्फ सरकारी बल्कि निजी अस्पताल तक में जगह नहीं बची थी। गंभीर रोगियों को बचाने के लिए केंद्र सरकार ने पीएम केयर्स फंड से मेडिकल कॉलेजों और सरकारी अस्पतालों में वेंटिलेटर भेजे। इसके तहत रानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में 94 वेंटिलेटर मिले थे। अब हालत यह है कि मेडिकल कॉलेज में पीएम केयर्स फंड से आए अधिकांश वेंटिलेटर बंद कमरों में धूल फांक रहे हैं। इनमें से अधिकतर खराब भी हो चुके हैं। खास बात यह है कि ये वेंटिलेटर अलग-अलग जगह पर छुपाकर रखे गए हैं ताकि लोगों की नजर न पड़े। कोरोना काल में पांच मंजिला सुपर स्पेशलिटी ब्लॉक को कोविड अस्पताल बनाया गया था। इसलिए इसके वार्डों में करीब 55-60 वेंटिलेटर हैं। कुछ वार्डों में वेंटिलेटर लगे हैं मगर ताला जड़ा हुआ है।
रखे-रखे खराब हुए, कराएंगे अनुरक्षण कार्य : प्राचार्य
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. एनएस सेंगर का कहना है कि वर्तमान में मेडिकल कॉलेज के पास 203 वेंटिलेटर हैं। इनमें पीएम केयर्स फंड में 94 वेंटिलेटर शामिल हैं। हकीकत यह है कि मेडिकल कॉलेज की अधिकतम क्षमता 85 वेंटिलेटरों को हैंडिल करने की हैं। इसलिए पीएम केयर्स फंड में आए वेंटिलेटर रखे हुए हैं। खराब हुए वेंटिलेटरों का अनुरक्षण कराने के लिए कंपनी को पत्र लिखा गया है। इसका खर्च मेडिकल कॉलेज वहन करेगा। प्राचार्य ने कहा कि यदि मेडिकल कॉलेज ललितपुर या कोई सरकारी संस्था वेंटिलेटर की मांग करती है तो इसे भेज दिया जाएगा।