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खरीदार न होने से सड़ जाती सब्जियां

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बंगरा (झांसी)। बढ़ती महंगाई से आम से लेकर खास तक सभी परेशान हैं। किसान भी महंगाई की मार से हैरान है। किसानों का कहना है कि वह बढ़ती महंगाई की समस्या से बाजार से खाली हाथ लौट रहे हैं। महंगी सब्जी आम आदमी के बजट से कम है। किसान नेता देवेन्द्र सिंह का कहना है किसानों के पास मंहगी फसल को उगाने के लिए पैसे की बड़ी तंगहाली है, किसान अगर मदद लेकर बाजार में सब्जियों का व्यापार करता है तो उनकी सब्जी लेने बाला कोई नहीं है। क्योंकि आसमान छूटे भावों से सभी परेशान हैं। व्यापारियों की मनमानी से आलू, प्याज से लेकर दाल, आटा का भाव सातवें आसमान पर हैं। रोज कमाने खाने वाले और दिहाड़ी मजदूरों का हाल बेहाल है। गरीब असहाय लाचार लोगों को सूखी रोटी खानी पड़ी रही हैं। लोग सब्जियों का स्वाद भूलते जा रहे हैं। बाजारों में किसानों की सब्जियों को खरीदार नहीं मिल रहे हैं, जिससे मंहगी सब्जियां सड़ तक जातीं हैं।
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किसानों को इस बढ़ती महंगाई में सरकारी मदद की आवश्यकता है। सरकार जमाखोरों पर कड़ी कार्रवाई करे।
अखिलेश लिटौरिया, जिला उपाध्यक्ष किसान संगठन
किसानों का दर्द अच्छी तरह से समझते हैं, किसान खेत से लेकर देश का अभिन्न अंग होता है, जिसको आज सरकारी सहारे की आवश्यकता है।
हरचरण लिटौरिया, वरिष्ठ समाजसेवी वयोवृद्ध नेता
किसान बड़ी मेहनत से काम करता है और जमाखोर व्यापारियों की वजह से देश का अन्नदाता आज खुद पेट की आग बुझाने को तरस रहा है।
रामप्रकाश पाठक, पूर्व पुलिस अधिकारी
आसमान छूती सब्जियों की वजह से गरीब, असहाय, मजदूर वर्ग बहुत परेशान है। कोई भी सब्जी 50 रुपये किलो से कम नहीं है।
सुरेश चंद्र बबेले, प्रदेश प्रभारी, स्वतंत्रता सेनानी संगठन
किसानों और आम आदमी की समस्या को समझते हुए केंद्रीय और प्रदेश सरकार जल्द ही कोई ठोस कदम जरूर उठायेगी।
शंकर लाल भोजबाल, भाजपा नेता
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