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राजघाट बांध को लेकर यूपी-एमपी आमने-सामने, जल आयोग में पहुंचा विवाद

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झांसी। बेतवा नदी पर बने राजघाट बांध के रखरखाव को लेकर यूपी-एमपी में तनातनी हो गई है। बांध के रखरखाव के लिए दोनों सूबों को पचास-पचास फीसदी पैसा देना होता है लेकिन, मध्य प्रदेश पिछले कई साल से यह पैसा नहीं दे रहा है। इस वजह से उसकी देनदारी करीब 70 करोड़ से अधिक हो चुकी है। उसके पैसा न देने से बांध की मरम्मत का काम लगातार मुश्किल होता जा रहा है। वहीं, यूपी के एतराज जताने पर मध्य प्रदेश के रवैये की शिकायत बेतवा रिवर बोर्ड ने केंद्रीय जल आयोग से की है।
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मध्य प्रदेश के अशोक नगर और यूपी ललितपुर सीमा पर बने राजघाट बांध परियोजना की आधारशिला तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने वर्ष 1971 में रखी थी जो 1999 में बनकर तैयार हुआ और वर्ष 2000 में पहली दफा बांध भरा गया। बांध के रखरखाव के लिए संसद ने एक्ट पारित करके बेतवा रिवर बोर्ड का गठन किया। दोनों प्रदेशों को पचास-पचास प्रतिशत राशि बोर्ड को देनी थी, जिससे इस बांध का बेहतर संचालन हो सके। कुछ समय तक तो एमपी अपने हिस्से का पैसा देता रहा लेकिन, बाद में उसने हाथ खींच लिए जबकि हर साल बांध संचालन पर करीब 40-45 करोड़ खर्च होते हैं। पिछले कई साल से एमपी अपने हिस्से से सिर्फ 5-10 करोड़ रुपये ही चुका रहा है। अब यह देनदारी बढ़कर 70 करोड़ से अधिक हो चुकी। इतनी बड़ी देनदारी हो जाने से बंाध के संचालन का काम प्रभावित होने लगा। कर्मचारियों को वेतन भी समय पर नहीं मिलता। इन परिस्थतियों को देख सिंचाई विभाग और बेतवा रिवर बोर्ड ने केंद्रीय जल आयोग से शिकायत की। शिकायत मिलने पर अध्यक्ष डा.आरके गुप्ता ने मध्य प्रदेश की खिंचाई करते हुए बकाया जारी करने के निर्देश दिए लेकिन, मध्य प्रदेश अभी भी अपने हिस्से का बजट देने को राजी नहीं हुआ। बेतवा रिवर बोर्ड सचिव शीलचंद्र उपाध्याय ने भी माना कि मध्य प्रदेश पिछले कई दशक से अपने हिस्से का बजट नहीं दे रहा है। उनका कहना है इस संबंध में शासन स्तर से पत्राचार हो रहा है।
इस वर्ष 45.29 करोड़ का बजट
बांध के रखरखाव पर हर माह करीब साढ़े चार करोड़ रुपये खर्च होते हैं। इन पैसों से बांध के लिए तैनात कर्मचारियों का वेतन समेत उसकी मरम्मत और अन्य कार्य कराए जाते हैं। वर्ष 2022 के लिए कुल 45.29 करोड़ रुपये खर्च का प्रावधान है। इसमें यूपी और एमपी को अलग- अलग 22.65 करोड़ देना है। यूपी ने अपना पूरा हिस्सा दे 22.65 करोड़ रुपये दे दिया लेकिन, मध्य प्रदेश ने सिर्फ 9.80 करोड़ रुपये ही दिया है।
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राजघाट नहर परियोजना से सिंचित इलाका (हेक्टेयर में)
उत्तर प्रदेश
- अपर राजघाट कैनाल 7809 हे.
- जाखलौन पंप कैनाल 23903 हे.
- लोवर राजघाट कैनाल 28388 हे.
- बेतवा एवं गुरसराय नहर (विस्तार) 62644 हे.
- बड़ागांव पंप कैनाल 3820 हे.
- झांसी कैनाल 12097 हे.
कुल 138661 हेक्टेयर
राजघाट बांध से सिंचित होने वाला मध्यप्रदेश का इलाका (हेक्टेयर में)
- राजघाट लोवर कैनाल 24291 हे.
- दतिया कैरियर कैनाल 3383 हे.
- दतिया कैनाल सिस्टम 57683 हे.
- बंडेढ कैनाल 36093
कुल 121450 हे.
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