आकर्षी और अमोली अपने पिता नीलेश मोदी के साथ।
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उंगली पकड़ कर जिसने चलना सिखाया, अपने पापा पर बहुत प्यार आया
झांसी। सभी की जिंदगी में बिना किसी स्वार्थ के सुरक्षा से लेकर हर जरूरत को पूरा करने वाले किसी एक शख्स का नाम पूछा जाए तो वह है पापा। कभी गोदी में चढ़कर तो कभी उंगली पकड़कर, पापा ही तो हैं जिन्होंने घर से लेकर बाजार तक, शिक्षा से व्यापार तक, सफलता की ऊंचाई तक पहुंचना सिखाया। यही नहीं, गरदिश के वक्त चारों तरफ असफलता में भी वो हमेशा ढाल बनकर खड़े हुए। हार में भी मस्कुराने का गुर दिया, दोबारा उठ कर फिर शीर्ष तक पहुंचने का मार्ग दिखाया। पिता रूपी ऐसी खास शख्सियत के लिए शहरवासियों ने फादर्स डे पर अपने-अपने अंदाज में सम्मान जताया। किसी ने सुबह उठते ही उनके चरणस्पर्श किए, किसी ने उन्हें पसंदीदा गिफ्त भेंट किया। कोई उनकी गोद में सिर रखकर भावुक हो गया तो कुछ ने उन्हें कार्ड भेंट कर और केक काट कर, दूर रह रहे बच्चों ने फोन और वीडियो कॉल कर फादर्स डे की शुभकामना दी। हर पिता ने अपने बेटे-बेटी को गले लगा कर हर खुशी का आशीष दिया। बड़ी तादाद में इन पलाें के फोटो अमर उजाला को भी भेजे।