झांसी। लक्ष्मणपुरा गांव में दो स्कूल हैं। लेकिन दोनों के ही हालातों में बड़ा अंतर है। एक स्कूल ऐसा है कि वहां सब कुछ व्यवस्थित है। सभी सुविधाएं हैं। बच्चों की संख्या भी 126 है। शिक्षक भी यहां 3 हैं। जबकि इस स्कूल से 200 मीटर की दूरी पर स्थित दूसरे स्कूल का हाल बेहाल है। फर्श टूटा पड़ा है। यहां बच्चों के पैरों में भी कांटे चुभते हैं। पानी भी बच्चे घर से भरकर लाते हैं। हालांकि घड़ा भी रखा हुआ है लेकिन एक घड़े से कितनों का भला होगा।
बड़ागांव ब्लाक के अंतर्गत आता है गांव लक्ष्मणपुरा। मंगलवार को जब अमर उजाला की टीम इस गांव में पहुंची तो सबसे पहले पूर्व माध्यमिक विद्यालय दिखाई दिया। जिसके बाहर कचरे का ढेर लगा हुआ था। जब हम स्कूल के भीतर पहुंचे तो वहां भी हाल बुरा था। गंदगी भीतर भी थी। फर्श उखड़ा पड़ा था। जगह जगह कूड़ा करकट था। बच्चों के पैरों में फर्श के टूटे पड़े नुकीले पत्थर चुभ रहे थे। क्योंकि कूड़ा कचरा पड़ा है लिहाजा कांटे भी बच्चों के पैरों में चुभते हैं। कक्षाओं में जब बच्चों से पूछा तो उन्होंने बताया कि छत का प्लास्टर कभी भी अचानक गिर जाता है। स्कूल की शिक्षिका शायना हाशमी ने बताया कि प्रधान से जब फर्श सही करवाने के लिए कहा जाता है तो वह कह देते हैं कि पहले स्कूल की छत विभाग से सही कराइए। उसके बाद फर्श दुरुस्त होगा। वहीं स्कूल में ट़ॉयलेट तो है लेकिन उसमें पानी का कनेक्शन नहीं है। पीने के पानी के लिए भी स्कूल की रसोइया दो मटके भरकर रख देती हैं। जिससे बच्चों का गुजारा हो जाता है। स्कूल की प्रधानाध्यापिका नीलिमा राजपूत चाइल्ड केयर लीव पर हैं, जिसका कारण स्कूल में वर्तमान में एक ही शिक्षिका हैं, जो 80 बच्चों को पढ़ा रही हैं।
यहां के बाद हम 200 मीटर आगे प्राथमिक विद्यालय लक्ष्मणपुरा में पहुंचे। यह विद्यालय बेहतर लगा। यहां 126 बच्चों का नामांकन है। स्कूल में एक प्रधानाध्यापिका समेत तीन सहायक और एक शिक्षामित्र नियुक्त हैं। इस स्कूल में साफ सफाई चौकस मिली। यूं कहिए कि किसी पब्लिक स्कूल से यह स्कूल कम नहीं था। बच्चों को पीने का शुद्ध पानी। साफ टॉयलेट। परिसर में कहीं भी गंदगी नहीं दिखी। गांव में भी इस स्कूल के उदाहरण दिए जाते हैं। बच्चों की हाजिरी भी बेहतर रहती है। प्रधानाध्यापिका गीतांजलि पुरोहित ने बताया कि स्कूल में केवल फर्नीचर नहीं है बाकी सभी व्यवस्थाएं हैं। बच्चे भी यूनिफार्म में आते हैं। दो साल पहले वितरित किए गए बैग के साथ ही विद्यार्थी कक्षाओं में पढ़ते मिले। शिक्षक बृजेंद्र आनंद ने बताया कि कुछ परिवार जो बच्चों को नहीं भेजते उनके घर जाकर बच्चों को बुलाकर स्कूल लाते हैं।
गांव की स्थिति उनको अबतक पता नहीं थी, कल ही जाकर पूरे मामले की जांच करेंगे। - जगत सिंह राजपूत, खंड शिक्षा अधिकारी, बड़ागांव