झांसी। कर्ज में डूबे दो किसानों ने आत्महत्या कर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इनमें से एक ने कीटनाशक खाकर मौत को गले लगा लिया, जबकि दूसरे ने खेत पर लगे पेड़ के सहारे गले में फंदा लगाकर जान दे दी। दोनों मामले अलग-अलग थाना क्षेत्रों के हैं।
टहरौली थाना क्षेत्र के गांव ताईजागीर निवासी कमल पाल (58) खेती कर परिवार का जीवन-यापन करते थे। भतीजे कल्याण ने बताया कि चाचा ने किसान क्रेडिट कार्ड से 2.60 लाख रुपये का कर्ज ले रखा था। इसके अलावा गांव के लोगों से भी कर्ज लिया था। चाचा के पास 11 बीघा खेती थी। उन्होंने पांच बीघा में गेहूं और छह बीघा में मटर की बोआई की थी। पांच बीघा में सिर्फ 10 बोरा गेहूं पैदा हुआ, जबकि छह बीघा में महज छह बोरा मटर पैदा हुई। इससे वह काफी चिंतित थे। बीते रविवार को वह घर पर अकेले थे। परिवार के लोग पहुंचे तो दरवाजा अंदर से बंद था। खटखटाने पर दरवाजा नहीं खुला। दरवाजा तोड़कर परिजनों ने भीतर प्रवेश किया। अंदर कमल पाल चारपाई पर बेसुध अवस्था में पड़े हुए थे। चारपाई के नीचे कीटनाशक का डिब्बा पड़ा हुआ था। परिजनों ने उन्हें मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया। यहां इलाज के मंगलवा देर रात दौरान उनकी मौत हो गई।
वहीं, बड़ागांव के जौरी बुजुर्ग निवासी मंगल सिंह (28) पत्नी वीनिता के साथ मंगलवार की रात खेत पर गेहूं की थ्रेसिंग कर रहे थे। करीब नौ बजे वह खेत से कुछ दूर चले गए। काफी देर तक नजर नहीं आए तो पत्नी ने उनकी तलाश शुरू कर दी। इसी दरम्यान उनका शव खेत पर लगे पेड़ के सहारे रस्सी पर झूलता मिला। कुल्हाड़ी से रस्सी काटकर परिजनों ने शव को नीचे उतारा। मृतक के बड़े भाई हरेंद्र सिंह ने बताया कि भाई मंगल सिंह पर सात-आठ लाख रुपये का कर्ज था। इससे वह परेशान रहता था। इसी परेशानी में उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। मृतक के दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। घटना के बाद से परिजनों का बुरा हाल बना हुआ है।