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Jhansi News: बीड़ी न मिलने से परेशान कबाड़ कारोबारी ने दी जान

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पैरालिसिस होने की वजह से डॉक्टर ने धूम्रपान करने से कर दिया था मना
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दो दिन पहले भी कर चुका था आत्महत्या की कोशिश
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। प्रेमनगर थाना इलाके में बीड़ी न मिलने से परेशान एक कबाड़ कारोबारी ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। दरअसल, कबाड़ कारोबारी को पैरालिसिस हो गया था। डाक्टर ने धूम्रपान से दूर रहने की सलाह दी थी। लेकिन, वह बीडी पीने का आदी था और तलब बर्दाश्त नहीं कर पा रहा है। दो दिन पहले भी वह आत्महत्या की कोशिश कर चुका था। शुक्रवार की शाम उसने घर की छत पर गले में फंदा कसकर जान दे दी।
हंसारी स्थित टपरियन निवासी संतोष अहिरवार (55) कबाड़ का कारोबार करते थे। वह कई सालों से बीड़ी पीने के आदी थे। छोटे भाई महेश अहिरवार ने बताया कि संतोष को चार महीने पहले पैरालिसिस हो गया था। पहले उनका इलाज मेडिकल कॉलेज में चलता रहा। तीन दिन पहले उन्हें ग्वालियर में दिखाया गया था। वहां डाक्टर ने बीड़ी, सिगरेट, तंबाकू और मांसाहारी भोजन से दूर रहने की सख्त हिदायत दी थी। परिवार के लोग इस बात का पूरा ख्याल रख रहे थे। वह बोल नहीं पाते थे, लेकिन इशारों में बीड़ी की मांग करते थे। न देने पर इशारों में खुद का गला दबाकर मरने की धमकी देते थे। दो दिन पहले उन्होंने आत्महत्या की कोशिश की थी, लेकिन तब उन्हें बचा लिया गया था।
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छोटे भाई महेश अहिरवार ने बताया कि शुक्रवार शाम बड़े भाई संतोष कबाड़ के गोदाम में पत्नी कृष्णा के साथ मौजूद थे। शाम को पत्नी कृष्णा किसी काम से चली गई। इसी बीच भाई छत पर पहुंच गए और टिनशेड के पाइप में रस्सी बांधकर लटक गए। लाइट चले जाने पर बहू सोनम छत पर गई तो उसने उन्हें फंदे पर झूलते हुए देखा। बहू की चीख-पुकार सुनकर अन्य लोग भी वहां पहुंच गए। उन्हें फंदे से उतारा, तब उनकी सांसें चल रहीं थीं। इस पर आनन-फानन उन्हें मेडिकल कॉलेज लाया गया। यहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
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बता दें कि संतोष के दो बेटे बॉबी व विवेक और एक बेटी गुन्नो है। बड़े बेटे की शादी हो चुकी है। संतोष की मौत के बाद से परिजनों का बुरा हाल बना हुआ है। पत्नी कृष्णा संतोष को याद कर बार-बार बेसुध हो जा रही है।
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