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Jhansi News: अधिकारियों से परेशानी पीड़ित ने तहसील में आत्मदाह का किया प्रयास

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गरौठा। एरच थाना क्षेत्र के ग्राम डिकौली में पट्टे वाली भूमि पर दबंगों द्वारा निर्माण नहीं होने देने पर पीड़ित परेशान है। बार बार अधिकारियों से शिकायत करने के बाद भी न्याय नहीं मिल पा रहा है। जिससे परेशान होकर पीड़ित ने उप जिलाधिकारी गरौठा कार्यालय के समक्ष पेट्रोल डालकर आत्मदाह करने का प्रयास किया। मौके पर मौजूद होमगार्ड ने मामले को भांपते ही पीड़ित के हाथ से पेट्रोल की बोतल और माचिस छीन ली। जिससे एसडीएम कार्यालय के समक्ष सनसनी मच गई। तत्काल घटना की सूचना गरौठा पुलिस को दी गई। घटना के दौरान एसडीएम अतुल कुमार तहसील में मौजूद नहीं थे। सूचना पर एसडीएम भी मौके पर पहुंच गए।
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डिकौली निवासी शिवदयाल ने आरोप लगाया है कि उसको गांव में जमीन का पट्टा मिला है। उक्त भूमि पर कब्जा दखल भी दे दिया गया था। उक्त भूमि पीड़ित की पुत्र वधू रामजानकी के नाम दर्ज है। जिस पर बहुत पहले से मकान बना हुआ था। पीड़ित भूमि पर मकान का निर्माण कार्य करवा रहा था। तभी गांव का दबंग निर्माण कार्य में बाधा उत्पन्न करने लगा। दबंग पुलिस और प्रशासन के बल पर उसका काम रोक देता है। इसकी शिकायत पीड़ित ने एरच थाना दिवस में की थी लेकिन दबंग के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। शुक्रवार को गरौठा आकर पीड़ित ने एसडीएम कार्यालय के समक्ष आत्मदाह करने की कोशिश की । लेकिन कार्यालय में तैनात एक होमगार्ड सुरेंद्र शर्मा की नजर पड़ने पर सुरक्षाकर्मी ने पेट्रोल की बोतल छुड़ाकर पीड़ित की जान बचाई। वहीं पीड़ित ने बताया गांव के कुछ दबंग किस्म के व्यक्ति उसे मकान बनाने से रोकते हैं जबकि वह अपनी निजी भूमि पर निर्माण कर रहा है। वहीं उसने थाना एरच की पुलिस और प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। जबकि दूसरे गांव के भानुप्रताप ने उपजिलाधिकारी को ज्ञापन देकर शिवप्रसाद पर ग्राम सभा की भूमि व खलिहान की भूमि पर मकान का निर्माण करने की शिकायत कर आरोप लगाया है। एसडीएम ने बताया है कि मामले की जांच कराई जाएगी।
पीड़ितों की नहीं सुनते अफसर
गरौठा तहसील क्षेत्र में तैनात अधिकांश अधिकारी पीड़ितों की सुनवाई नहीं करते हैं। प्रार्थना पत्रों पर ‘नियमानुसार कार्रवाई करें’ लिखकर एक दूसरे अधिकारियों के पास भेज देते हैं। इसी वजह से लोग परेशान है। एक-एक शिकायतों के निस्तारण में महीनों लग जाते हैं। अधिकारी समय से तहसील और थाने में भी नहीं बैठते हैं। इसी वजह से पूरी व्यवस्था चरमरा गई है।
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