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Jhansi News: ग्वालियर बरौनी ट्रेन के जनरल कोच से यात्रियों को जबरन उतारा, दूसरे डिब्बों में भीड़ हुई ठसाठस

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झांसी। ट्रेन आने पर हर शहर में रेलवे स्टेशन पर रोज लगभग एक जैसी ही भागदौड़ होती है। लेकिन शनिवार को वीरांगना लक्ष्मीबाई रेलवे स्टेशन झांसी में जो नजारा दिखा वह रेलवे द्वारा आम आदमी की सुविधाओं पर हंटर चलाने जैसा था। यहां ग्वालियर बरौनी ट्रेन के जनरल कोच में यात्रियों को धक्का देकर जबरदस्ती नीचे उतारकर पार्सल लाद दिए गए। जबकि यात्रियों ने बताया कि टिकट लेते समय उन्हें कोई जानकारी नहीं दी गई।
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प्लेटफॉर्म नंबर एक पर दोपहर तकरीबन 2.13 बजे ग्वालियर बरौनी ट्रेन पहुंची थी। ट्रेन रुकते ही जनरल डिब्बे में सवार होने वाले यात्रियों की भीड़ उसमें चढ़ने लगी। कुछ यात्री सीटों पर बैठ गए, लेकिन इसी बीच रेलवे के कुछ कर्मचारियों ने ट्रॉली पर लदे सैकड़ों पार्सल कोच के गेट पर लगा दिए। उन्होंने यात्रियों को जबरदस्ती उतारकर कोच की सीटों पर पार्सल भरना शुरू कर दिया। कुछ यात्री धक्का-मुक्की कर गेट पर चढ़े तो कर्मचारी ने उन्हें घुसने ही नहीं दिया। भीड़ में कई लोग गिरने से बचे। एक कोच से निकाले जाने के बाद दूसरे और तीसरे जनरल कोच के लिए भीड़ बेतहाशा दौड़ रही थी। चंद मिनट में ही दोनों जनरल डिब्बे ठसाठस हो गए। एक सीट पर तीन की जगह छह-सात लोग बैठे दिखे।
वहीं, पार्सल भर रहे कर्मचारियों ने कहा कि ट्रेन के जनरल डिब्बों की 40 सीटों पर आरएमएस (रेलवे मेल सर्विस) की डाक जा रही है।
झांसी से दीदी और जीजा को कानपुर जाना था। मैं उन्हें ट्रेन में बैठाने आया था। लेकिन, बिना किसी जानकारी के जनरल कोच में चढ़ने के बाद उतार दिया गया। इसके बाद डिब्बे में पार्सल लाद दिए गए। बड़ी अफरा-तफरी रही। ग्वालियर बरौनी ट्रेन में ये रोज की बात हो गई है।
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अर्जुन चक्रवर्ती
दो छोटे बच्चों के साथ पंजाब से आईं स्नेहलता पहले जनरल डिब्बे में चढ़ तो गईं लेकिन जैसे ही रेलवे कर्मी पार्सल लेकर पहुंचे, उन्होंने डिब्बे से सबको उतार दिया। स्नेहलता भी बच्चों को लेकर भीड़ में कई बार गिरते-गिरते बचीं। उनके साथ आए परिजन सुभाष ने एक बच्चे को संभाला और जल्दी से बगल के दूसरे जनरल डिब्बे में घुसे। लेकिन भीड़ में स्नेहलता को बच्चों के साथ बाथरूम के पास बैठना पड़ा।
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बेटे को ग्वालियर बरौनी ट्रेन में बैठाने आया था। उसे देवरिया जाना था। ट्रेन में लोगों को जबरदस्ती नीचे उतार दिया गया। भागे-भागे लोग दूसरे डिब्बे की तरफ पहुंचे। जिसे जहां जगह मिली वह घुस गया। ट्रेन के जनरल कोच में पार्सल रखे जाएंगे, पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई।
फारुख कुरैशी
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मैं तो महोबा जाने के लिए दूसरी ट्रेन का इंतजार कर रहा था। ग्वालियर बरौनी ट्रेन एक नंबर प्लेटफॉर्म पर आकर रुकी तो अफरातफरी में कई लोग गिरते-गिरते बचे। यूं तो हर ट्रेन में चढ़ने-उतरने पर भीड़ होती है, लेकिन ट्रेन में चढ़े लोगों को उतारे जाने के बाद स्थिति बेकाबू हो गई।
धर्मजीत
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मैं मेरी मां और छोटी बहन उरई जाने के लिए ट्रेन में बैठीं थीं। सामान्य टिकट लिया था तब नहीं बताया गया था कि कोच में पार्सल भरे जाएंगे। ट्रेन आई तो स्थिति खराब थी। बड़ी मुश्किल से सीट मिली। उसमें भी तीन की जगह छह-सात लोग बैठे थे। सारी बर्थ ऐसे ही भरी थीं।
अंजलि
ट्रेनों के इंतजार में भरे रहे प्लेटफॉर्म
कोहरे के कारण कई ट्रेनें लेट होने से रेलवे स्टेशन से प्लेटफॉर्म नंबर एक, दो-तीन, चार और पांच पर यात्रियों की भारी भीड़ जमा थी। गलन भरी ठंड के चलते यात्री कांप रहे थे। चाय के स्टॉलों पर भी भीड़ थी। कुछ लोगों ने बच्चों को सामान पर बैठा रखा था।
यात्रियों की भीड़ में लग रही झाड़ू
प्लेटफॉर्म नंबर चार पर भीड़ के बीच ही रेलवे के सफाई कर्मचारी दोपहर में झाड़ू लगाते दिखे। ट्रेन के इंतजार में जमीन पर बैठे लोगों ने इस पर आपत्ति जताई कि झाड़ू के कारण बहुत धूल उड़ रही है लेकिन कर्मचारी नहीं रुका, कुछ देर में यात्री सामान उठाकर खुद ही किनारे उठते दिखे।
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