1942 से बेसिक प्राथमिक विद्यालय उनाव गेट (बालक) में सुबह सात से 12 बजे तक लग रही हैं कक्षाएं
प्वाइंटर
एक शिक्षा मित्र के सहारे चल रहा प्रावि पुरानी नजहाई
सुबह 11:45 बजे से लगती हैं प्रावि कन्या की कक्षाएं
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बेसिक शिक्षा की बदहाली के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। एक ओर जहां सभी सुविधाओं से युक्त स्कूलों के कमरे खाली पड़े हैं वहीं एक परिसर में ही तीन स्कूल चल रहे हैं। बेसिक प्राथमिक विद्यालय उनाव गेट के परिसर में तीन स्कूल हैं। तीनों विद्यालयों में तीन शिक्षामित्र और दो प्रधानध्यापक हैं, जबकि छह रसोइया तैनात हैं। तीनों विद्यालयों में कक्षा एक से पांच तक की कक्षाएं चलती हैं।
बेसिक प्राथमिक विद्यालय (कन्या) के प्रधान अध्यापक संजीव दुबे ने बताया कि विद्यालय में 55 विद्यार्थी हैं। कक्षाएं सुबह 11:45 बजे से शाम 4:30 बजे तक लगती हैं। यहां एक शिक्षा मित्र भी तैनात है। इसी परिसर में पांच साल पहले बेसिक प्राथमिक विद्यालय पुरानी नजहाई भी शिफ्ट हुआ है, जिसमें 30 विद्यार्थी हैं और एक शिक्षा मित्र तैनात है। इस विद्यालय में सुबह सात बजे से 12 बजे तक कक्षाएं लगती हैं। इसी परिसर मेंं बेसिक प्राथमिक विद्यालय उनाव गेट (बालक) चलता है, जिसमें 120 विद्यार्थी हैं, इस विद्यालय का समय आजादी के पहले से आज तक नहीं बदला है। इस विद्यालय में एक प्रधान अध्यापक और एक शिक्षा मित्र की तैनाती है। यहां सुबह सात बजे से 12 बजे तक कक्षाएं लगती हैं। संजीव दुबे ने बताया कि तीनों विद्यालयों में मिड-डे-मील बनाने के लिए दो-दो रसोइया तैनात हैं, जबकि सफाईकर्मी नहीं है।
विद्यालयों में तीन टीवी, दो के डिब्बे ही नहीं खुले
तीनों विद्यालयों में एक-एक बड़ी एलईडी टीवी है। बेसिक प्राथमिक विद्यालय (कन्या) में टीवी चल रहा है, जबकि जगह न होने पर बाकी दोनों स्कूलों में टीवी डिब्बों में बंद रखे हैं। प्रधानाध्यापक संजीव दुबे बताते हैं कि स्कूल के गेट पर लगे दोनों हैंडपंप खराब हैं, जिन्हें ठीक कराया जाना चाहिए। हालांकि विद्यालय में पानी की टंकी लगी है, लेकिन कभी-कभी आपूर्ति पर्याप्त न होने के कारण टंकी खाली रह जाती है।
दीवारों पर आ रही सीलन, बरामदे में बैठते हैं बच्चे
विद्यालय का भवन पुराना बना है, जिसके चलते दीवारों में सीलन है। समय-समय पर रंगाई-पुताई के द्वारा भवन ठीक करने के प्रयास किए जाते हैं, लेकिन भवन पुराना होने के कारण दीवारों में सीलन बनी रहती है। इसी तरह भवन छोटा होने के कारण बरामदे में बच्चों को बैठाया जाता है। बरामदे के सामने ही रसोई बना है, जिसमें मिड-डे-मील बनाने का काम चलता रहता है।
एक ही परिसर में अलग-अलग चल रहे विद्यालयों का समय एक ही होना चाहिए। विद्यालय का समय सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक निर्धारित है। यदि कहीं इस व्यवस्था का पालन नहीं किया जा रहा है तो जांच कराकर पालन कराया जाएगा।
- नीलम यादव, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी