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Jhansi News: झांसी में 30 बच्चे ऐसे, जिन्हें हर महीने चढ़ाना पड़ता है खून

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थैलेसीमिया से ग्रसित होने से बार-बार कम हो जाता है हीमोग्लोबिन
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अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज में हर महीने 30 बच्चे ऐसे आते हैं, जिन्हें खून चढ़ाना पड़ता है। ये बच्चे थैलेसीमिया से ग्रसित हैं, जिनका हीमोग्लोबिन बार-बार कम हो जाता है। इसमें अधिकतर बच्चे एक साल से लेकर 10 साल तक के होते हैं।
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हीमोग्लोबिन अल्फाग्लोबिन और बीटाग्लोबिन प्रोटीन से बनता है। मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. ओमशंकर चौरसिया ने बताया कि थैलेसीमिया इस प्रोटीन में ग्लोबिन निर्माण की प्रक्रिया में खराबी होने से होता है। इससे लाल रक्त कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं। रक्त की काफी कमी हो जाने से मरीज के शरीर में बार-बार रक्त चढ़ाना पड़ता है। माता और पिता दोनों के जीन में थैलेसीमिया होने से बच्चे को होने वाला रोग मेजर थैलेसीमिया होता है। वहीं, माइनर थैलेसीमिया उन बच्चों को होता है, जिन्हें प्रभावित जीन माता-पिता में से किन्हीं एक में होता है। उन्होंने बताया कि इस बीमारी से ग्रसित बच्चों में जन्म से चार से छह महीने में लक्षण दिखने लगते हैं। कुछ बच्चों में पांच से 10 साल के बीच लक्षण दिखाई देते हैं। कहा कि मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया के 85 मरीज पंजीकृत हैं। इसमें 30 ऐसे बच्चे हैं, जिन्हें हर महीने खून चढ़ाना पड़ता है। ब्लड बैंक प्रभारी डॉ. एमएल आर्या ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में थैलेसीमिया मरीजों को नि:शुल्क ब्लड चढ़ाया जाता है। कई मरीज तो ऐसे आते हैं, जिनका हीमोग्लोबिन घटकर पांच तक पहुंच जाता है।
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ये हैं लक्षण
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- बच्चे का चिड़चिड़ा हो जाना
- हर समय थकावट महसूस होना
- दांत टेढ़े-मेढ़े हो जाना
- माथा चौड़ा हो जाना
- त्वचा, आंख, जीभ, नाखून सफेद पड़ना
- खून की कमी से सांस फूलने लगती



इन बातों का रखें ध्यान ............................
- विवाह से पहले महिला और पुरुष रक्त की जांच कराएं।
- गर्भावस्था के दौरान भी इसकी जांच कराएं।
- रोगी का हीमोग्लोबिन 10 के नीचे न जाने दें।
- समय पर दवाएं लें और पूरा इलाज कराएं।
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