झांसी। जिले का सबसे पिछड़ा इलाका आने वाले दिनों में विकास के पथ पर सरपट दौड़ता नजर आएगा। गरौठा क्षेत्र के लिए बुंदेलखंड एक्सप्रेस - वे वरदान साबित होगा। वैसे भी इसी क्षेत्र में डिफेंस कॉरिडोर की स्थापना की जा रही है, लेकिन दिल्ली से सीधी कनेक्टिविटी न होने के कारण कॉरिडोर की स्थापना का काम रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा था। यह कागजों में ही सिमटा हुआ था। लेकिन अब एक्सप्रेस वे बन जाने के बाद से इसका काम जोर पकड़ने की संभावना जताई जा रही है।
शनिवार को जालौन आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 296 किलोमीटर लंबे बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे का लोकार्पण किया। एक्सप्रेस-वे से बुंदेलखंड के चित्रकूट, बांदा, महोबा, हमीरपुर व जालौन जिले सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। जबकि, झांसी जनपद के गरौठा क्षेत्र की इससे कनेक्टिविटी उरई होते हुए लगभग 30 किमी की दूरी पर है। बुंदेलखंड से दिल्ली का रास्ता आसान बनाने के लिए इसका निर्माण किया गया है। इसका सबसे ज्यादा लाभ झांसी जनपद के गरौठा क्षेत्र को होगा। यहां के लोग महज 30 किमी की दूरी तय कर एक्सप्रेस पर चढ़कर लगभग साढ़े पांच घंटे में दिल्ली पहुंच सकेंगे। जबकि, उन्हें अभी दिल्ली का रास्ता पकड़ने के लिए 65 किलोमीटर का सफर तय कर झांसी आना होता है। यहां से वे ग्वालियर रोड पर दिल्ली के लिए आगे बढ़ते हैं।
झांसी में बनने वाले डिफेंस कॉरिडोर के लिए एक्सप्रेस-वे सबसे ज्यादा फायदेमंद साबित होने वाला है। 19 नवंबर 2021 को झांसी आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने डिफेंस कॉरिडोर की पहली कंपनी भारत डायनामिक्स लिमिटेड की आधारशिला रखी थी। यह कंपनी यहां 400 करोड़ रुपये का निवेश करने जा रही है। इसके अलावा अन्य कंपनियों से भी डील फाइनल हो चुकी है, बावजूद मौके पर काम अब तक किसी भी कंपनी ने शुरू नहीं किया है। इसकी सबसे बड़ी वजह से दिल्ली से सीधी कनेक्टिविटी न होना बताई जाती रही। कंपनी के प्रतिनिधियों को पहले झांसी आना होता था और यहां से ग्रामीण सड़कों का 65 किमी लंबा सफर तय कर कॉरिडोर के लिए आरक्षित भूमि पर पहुंचना होता था। लेकिन, अब वे बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के जरिये सीधे गरौठा तहसील पहुंच सकेेंगे।
कृषि उत्पाद को मिलेंगे बड़े बाजार
झांसी। गरौठा क्षेत्र में सिंचाई के साधनों का अभाव है। यहां के ज्यादातर किसान वर्षा जल पर ही निर्भर हैं। लेकिन, बारिश भी अक्सर यहां साथ छोड़ देती है। इसका अंदाजा पिछले साल के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। पिछले मानसूनी सीजन में झांसी सदर क्षेत्र में 795 मिमी वर्षा हुई थी, जबकि गरौठा में महज 315 मिमी ही पानी गिरा था। ऐसे में यहां के किसान कम पानी की दलहनी और तिलहनी फसलों को प्राथमिकता देते हैं। पिछले साल यहां जिले में सबसे ज्यादा 19,700 हेक्टेअर में उर्द, मूूंग, तिली, ज्वार, बाजरा व मक्का का उत्पादन किया गया था। अब तक यहां के किसान झांसी और उरई की मंडियों में अपने कृषि उत्पादन बेचते थे, लेकिन अब वे एक्सप्रेस-वे के जरिये आगरा, दिल्ली की ओर भी रुख कर सकेंगे। जहां उन्हें अच्छे दाम मिलेंगे।
इन कारोबारों को भी मिलेगी गति
झांसी। झांसी व आसपास के सभी जनपदों की थोक मार्केट दिल्ली है। प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक आइटम, कपड़े, दीपावली व अन्य त्योहारों पर काम में आने वाले सीजनल उत्पादों की 80 प्रतिशत खेप यहां दिल्ली से ही आती है। एक्सप्रेस - वे के जरिये ये अब ये आइटम दिल्ली से झांसी लाना बेहद आसान होगा।
बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे: एक नजर में...
- 29 फरवरी 2020 को हुआ था शिलान्यास
- 16 जुलाई 2022 को हुआ लोकार्पण
- 296.070 किलोमीटर है लंबाई
- 14,849.09 करोड़ आई लागत
क्षेत्र के विकास में बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे मील का पत्थर साबित होगा। इसके बन जाने से खासतौर पर ई-कॉमर्स कंपनियां यहां की ओर रुख करेंगी। बेहतर कनेक्टिविटी होने की वजह से वे एक्सप्रेस - वे के इर्दगिर्द अपने बड़े गोदाम बनाएंगी। एक्सप्रेस-वे का निर्माण शुरू होने के साथ ही कंपनियों की ओर से इस दिशा में पहल शुरू कर दी गई थी।
- डा. पीके अग्रवाल, रिटायर्ड आईएएस
गरौठा को जनपद का सबसे पिछड़ा इलाका माना जाता है। लेकिन, आने वाले सालों में ये विकास में सबसे आगे होगा। यहां बनने वाला डिफेंस कॉरिडोर रोजगार के हजारों अवसर पैदा करेगा। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे इस काम को और भी आसान बनाएगा। क्षेत्र के सर्वांगीण विकास को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार द्वारा क्षेत्र को यह सौगात दी गई है।
- मनीष चौधरी, उपायुक्त - उद्योग
एक्सप्रेस-वे के बन जाने से झांसी से देश की राजधानी का एक और रास्ता खुल गया है। अब झांसी की दिल्ली से दो ओर से सीधी कनेक्टिविटी हो गई है। इसका लाभ भी यहां के लोगों को मिलेगा। जमीन की पर्याप्त उपलब्धता होने की वजह से बाहर के कई उद्यमी यहां अपनी इकाइयां लगाना चाहते हैं, परंतु कनेक्टिविटी न होने की वजह से वे पीछे हट जाते थे। अब यह कमी भी दूर हो गई है।
- धीरज खुल्लर, महासचिव - बुंदेलखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री
डिफेंस कॉरिडोर से छोटे उद्यमियों को बड़ी उम्मीद बंधी हुई है। उम्मीद है कि कॉरिडोर की बड़ी कंपनियां छोटे कलपुर्जे स्थानीय इकाइयों से ही लेंगी। अब बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे के बन जाने से क्षेत्र के औद्योगिक विकास का एक नया रास्ता खुल गया है। यहां की स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्री अपने उत्पाद दिल्ली की मार्केट तक आसानी से पहुंचा सकेंगे। वहां उन्हें देश भर के खरीदार मिलेंगे।
- राजेश शर्मा, अध्यक्ष - चैंबर ऑफ स्मॉल एंड माइक्रो इंडस्ट्री