झांसी। रेलवे की जमीन पर सालों पहले कब्जाधारियों ने आलीशान मकान खड़े कर लिए, लेकिन रेलवे अफसरों की उदासीनता के चलते कोई कार्रवाई नहीं की गई। बृहस्पतिवार को जब रेलवे बोर्ड की अध्यक्ष यहां आईं तो यह मुद्दा उठा। उन्होंने कब्जाधारियों को चिह्नित कर रेलवे की जमीन खाली कराने के निर्देश दिए।
बीते साल 11 फरवरी को झांसी स्टेशन की नई बिल्डिंग के निर्माण को लेकर प्रक्रिया आगे बढ़ी ताे रेलवे की जमीन पर कब्जा का मामला सामने आया। अधिकारियों ने इसकी सूची तैयार की। इसी दौरान इलाहबाद हाइकोर्ट का भी फरमान आ गया कि रेलवे की भूमि पर जहां भी अवैध धार्मिक स्थल है, उसे तत्काल हटाया जाए। पहला आदेश और दूसरा स्टेशन के लिए भूमि की आवश्यकता को देखते हुए रेलवे ने तत्परता दिखाई और 98 स्थानों को चिह्नित कर कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर दिए। 53 धार्मिक स्थलों को नोटिस जारी किया गया। वहीं, रेलवे की पश्चिम कॉलोनी की जमीन पर अवैध रूप से 45 मकान बनाकर रहे लोगों को को 15 दिन में जमीन खाली करने का नोटिस जारी किया गया। इसके बाद कोई कार्रवाई नहीं हुई।
नोटिस जारी होने के बाद लगा कि रेलवे की जमीन को मुक्त करा लिया जाएगा। बाकायदा पुलिस के आलाधिकारियों काे पत्र भी लिखा गया कि 15 दिन बाद इन अवैध निर्माण पर बुल्डोजर की कार्रवाई की जानी है। पर्याप्त पुलिस बल उपलब्ध कराएं। लेकिन हालात जस के तस रहे। (संवाद)
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रेलवे की भूमि पर कब्जा को लेकर रेल प्रशासन ने यदि नियमानुसार नोटिस जारी किए हैं तो फिर उन्हें अवैध निर्माण ध्वस्त करने होते हैं। हमने अधिकारियों को प्रक्रिया अपनाते हुए रेलवे की भूमि से अवैध निर्माण हटाने के निर्देश दिए हैं। - जया वर्मा सिन्हा, अध्यक्ष रेलवे बोर्ड