संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। सोमवार शाम को आसमान में चांद का दीदार होने के साथ ही माह ए रमजान का आगाज हो गया। चांद दिखने के बाद मुस्लिम समुदाय के लोगों ने एक-दूसरे को रमजान की मुबारकबाद दी। साथ ही मस्जिदों में तरावीह की नमाज अदा की गई। मंगलवार को रोजेदारों ने सहरी कर पहला रोजा रखा।
सोमवार को मगरिब की नमाज अदा होते ही मुस्लिम बस्तियों में बच्चों और महिलाओं ने चांद के दीदार के लिए छतों का रुख किया। पुरुष भी मस्जिदों में नमाज अदाकर आसमान को निहारते नजर आए। मस्जिद बिसाती बाजार में रुय्यत-ए-हिलाल कमेटी की बैठक के दौरान चांद की तस्दीक की गई। चांद दिखने के बाद हिलाल कमेटी के सदस्यों ने रमजान माह शुरू होने का एलान किया। इसके बाद लोगों ने एक-दूसरे से गले मिलकर मुकद्दस रमजान की बधाई दी। बैठक में मौलाना खुर्शीद, मुफ्ती खालिद, मौलाना एजाज, मौलाना रिजवान, हाफिज रियाज, हाफिज असद मौजूद रहे।
-
एक नेकी का मिलता है 70 गुना सवाब
मुफ्ती आरिफ नदवी ने बताया कि माह ए रमजान को रहमत, बरकत और इबादत का महीना कहा जाता है। इस पाक महीने में सवाब (पुण्य) का दर्जा 70 गुना अधिक होता है। इसके चलते मुस्लिम समुदाय के लोग सुबह सूर्योदय से सूर्यास्त तक भूखे प्यासे रहकर ज्यादा से ज्यादा वक्त इबादत में गुजारते हैं। लोगों की भलाई के काम करते हैं। इस महीने में ही लोग जकात अदा करते हैं।
-
शैतान को कर दिया जाता है कैद
मुफ्ती साबिर कासमी ने बताया कि मुकद्दस रमजान की शुरुआत होते ही दोजख (नरक) के दरवाजे बंद कर दिए जाते हैं। इसके साथ ही जन्नत के सातों दरवाजे मोमिनों के लिए खुल जाते हैं। साथ ही शैतान को भी कैद कर दिया जाता है। रमजान में मृत्यु होने पर इंसानी रूह सीधी जन्नत में दाखिल होती है। ईद-उल-फितर के बाद उसके ही आमालों (कर्मों) का हिसाब-किताब होता है।