अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। भारतीय न्याय संहिता के अंतर्गत दर्ज होने वाले मुकदमों की विवेचनाएं न सिर्फ नब्बे दिन में पूरी करनी होंगी बल्कि चार्जशीट दाखिल होने के साठ दिन के अंदर कोर्ट को आरोप भी तय करने होंगे। इसके साथ ही मामलों की सुनवाई पूरी होने के तीस दिनों के अंदर फैसला भी सुना दिया जाएगा। अधिवक्ताओं का कहना है कि इन नए प्रावधानों से मुकदमों का निपटारा समय से हो सकेगा।
एक जुलाई से सीआरपीसी की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता ने ले ली। सीआरपीसी में 484 धाराएं थीं, जबकि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में 531 धाराएं हैं। नागरिक सुरक्षा संहिता के जरिये विवेचनाओं के तौर-तरीकों में बदलाव हुआ है। अधिवक्ता राजेश मिश्रा के मुताबिक पहले इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को मान्यता नहीं मिलती थी लेकिन, अब ऑडियो-वीडियो पर्याप्त सबूत माने जाएंंगे। विवेचक को अधिकृत ई-मेल आईडी दी जाएगी।
इसी तरह चार्जशीट दाखिल होने के बाद भी फरार रहने वाले अभियुक्तों का कोर्ट में ट्रायल चल सकेगा। अभी तक आरोपी के फरार होने से उसके खिलाफ कोर्ट में ट्रायल आरंभ नहीं होता था। इसका सीधा फायदा अभियुक्त को मिलता था। कई मामलों में ऊपरी अदालत में अपील भी नहीं हो सकेगी। नए प्रावधानों में सेशन कोर्ट से किसी दोषी को तीन महीने या उससे कम की जेल या 200 रुपये का जुर्माना या दोनों की सजा मिलती है, तो इसे चुनौती नहीं दिया जा सकता।
वहीं, जेल के बोझ को कम करने की खातिर भी कई प्रावधान किए गए। एक तिहाई से ज्यादा सजा जेल में काट चुके अंडर ट्रायल कैदी को जमानत दी जा सकती है। एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि नई धाराओं में दर्ज होने वाले मुकदमों के लिए अलग से विवेचनाएं होंगी। इसके लिए विवेचकों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
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अब ''''समाज सेवा'''' करके भी छूट सकते हैं दोषी
नए कानून में सामाजिक सेवा करने की सजा का प्रावधान किया गया है। अधिवक्ता दिलीप शांडिल्य का कहना है कोई भी सरकारी सेवक किसी तरह के कारोबार में शामिल नहीं हो सकता। ऐसा करते पाए जाने पर जेल या जुर्माना हो सकता है। आरोपी को सामाजिक सेवा करने की सजा भी मिल सकती है। कोर्ट के समन पर अगर कोई आरोपी पेश नहीं होता तब अदालत तीन साल की जेल या जुर्माना सुना सकती है। ऐसे मामलों में कम्युनिटी सर्विस की सजा सुना सकती है। पांच हजार रुपये से कम कीमत की संपत्ति की चोरी करने पर अगर किसी को पहली बार दोषी ठहराया जाता है तो संपत्ति लौटाने पर उसे कम्युनिटी सर्विस की सजा दी जा सकती है। अगर कोई व्यक्ति नशे की हालत में सार्वजनिक स्थान पर हंगामा करता है तब उसे चौबीस घंटे जेल अथवा एक हजार रुपये तक का जुर्माना या दोनों या फिर कम्युनिटी सर्विस की सजा मिल सकती है।