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Jhansi News: मई की गर्मी ने यात्रियों को किया बेहाल, एक हजार बार फेल हुए एसी और सुस्त रही ट्रेनों की चाल

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संवाद न्यूज एजेंसी
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झांसी। गर्मी के मौसम में रेल यात्रियों ने राहत भरे सफर के लिए एसी कोच में आरक्षित टिकट बुक कराया था लेकिन, भीषण गर्मी के आगे ट्रेनों के एसी भी फेल हो साबित हुए। अप्रैल के मुकाबले मई में ट्रेनों के एसी फेल होने की संख्या दोगुनी तक पहुंच गई। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार अकेले मई माह में ट्रेनों के एसी एक हजार बार फेल हुए हैं। गनीमत यह रही कि ट्रेन के झांसी पहुंचने पर एसी ठीक किए गए या फिर कोच बदल दिए गए।
इस साल गर्मी के मौसम में पारा रिकॉर्ड स्तर तक जा पहुंचा। घर से लेकर ट्रेनों तक कहीं भी लोगों को गर्मी से राहत नहीं मिली। झांसी रेल मंडल से होकर आने-जाने वालीं औसतन 121 ट्रेनों में से प्रतिदिन दस से बाहर ट्रेनों के एसी गर्मी के चलते बार-बार फेल हुए हैं। रेलवे को मिली शिकायतों के अनुसार अप्रैल माह में 541 बार ट्रेनों के एसी फेल हुए हैं। वहीं, मई माह में जब पारा 48 डिग्री सेल्सियस तक जा पहुंचा तो ट्रेनों के एसी भी जवाब दे गए। रेल मदद पर एसी और कोच के अन्य उपकरणों के फेल होने की 1,723 शिकायतों में से एसी फेल होने की 1004 शिकायतें दर्ज की गईं। इनमें से कई ट्रेनें ऐसी रहीं, जिनमें यात्रियों को 300 किलोमीटर तक बिना एसी के यात्रा करनी पड़ी।
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जून में 24 घंटे में नौ ट्रेनों के एसी हुए फेल
ट्रेनों में एसी फेल होने का सिलसिला अप्रैल और मई तक ही सीमित नहीं रहा। इस माह जून के 24 घंटे में झांसी रेल मंडल से गुजरने वाली लखनऊ एक्सप्रेस के बी-1 कोच, गोरखपुर-पुणे समर स्पेशल के बी-3 कोच, लखनऊ एक्सप्रेस के सी-1 कोच, प्रथम स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस के बी-1 कोच, झांसी-लखनऊ इंटरसिटी एक्सप्रेस के सी-2 कोच, झांसी-कोलकता एक्सप्रेस के बी-1 कोच, गीता जयंती एक्सप्रेस के बी-3 कोच, ग्वालियर-बरौनी मेल के बी-3 कोच और पुणे समर स्पेशल एक्सप्रेस के बी-4 कोच का एसी फेल रहा। जिसके चलते यात्रियों को एक से चार घंटे तक परेशानी का सामना करना पड़ा।

- गर्मी में बिगड़ी तबीयत

एसी फेल होने का खामियाजा बड़ों से लेकर बच्चों तक सभी को उठाना पड़ा। इस दौरान बच्चों और बुजुर्गों की हालत भी बिगड़ी। इसके अलावा जो लोग बीमारी का इलाज कराने जा रहे थे, उन्हें भी असुविधाओं का सामना करना पड़ा।
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वर्जन
गर्मी में ट्रेनों के एसी में कुछ परेशानियां हुई हैं, लेकिन समय रहते उन्हें ऑनबोर्ड तकनीकी स्टाफ ने ठीक कर दिया। कुछ ट्रेनों में ज्यादा दिक्कत आने पर उनके कोच भी बदले गए।
- मनोज कुमार सिंह, मंडल रेल जनसंपर्क अधिकारी, झांसी।
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