झांसी। होम्योपैथी अस्पताल भी डॉक्टर और स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। जिले के नौ में दो अस्पतालों में डॉक्टर ही नहीं हैं। विभाग में बाबू का पद ही नहीं है। ऐसे में डॉक्टरों को ही कागजी कार्रवाई करनी पड़ रही है। दवाओं की कागजी कार्रवाई से बचने के लिए चिकित्सक अस्पताल में बहुत अधिक दवाएं तक नहीं मंगवाते हैं।
झांसी में जिला अस्पताल, कोछाभावर, सीपरी बाजार, बबीना, आवास विकास, बड़ागांव, चिरगांव, मऊरानीपुर और कटेरा में होम्योपैथी अस्पताल खुले हुए हैं। इसमें सीपरी बाजार और कटेरा में डॉक्टर नहीं हैं। सीपरी बाजार का अस्तपाल तो फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। वहीं, मऊरानीपुर की चिकित्सक को सप्ताह में दो दिन के लिए कटेरा में संबद्ध किया गया है। इसके अलावा सिर्फ बबीना, सीपरी बाजार और जिला अस्पताल में खुले होम्योपैथी अस्पताल में ही फार्मासिस्ट हैं। बाकी छह अस्पतालों में डॉक्टर फार्मासिस्ट का भी काम करते हैं। विभाग में बाबू का पद ही नहीं है। इससे कार्यालय के संचालन में दिक्कत होती है। दवाओं की लिखा पढ़ी से लेकर वेतन समेत समस्त वित्तीय कार्य जिला होम्योपैथी अधिकारी को करना पड़ता है। कई अस्पतालों में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी नहीं हैं। इसमें आठ अस्पताल तो सीएचसी, पीएचसी पर संचालित हैं। जबकि, सीपरी बाजार का किराए पर है। हालांकि, चिरगांव और कटेरा में अस्पताल के लिए होम्योपैथी विभाग के नाम पर भूमि आवंटित हो गई है। आयुष विभाग से निर्माण के लिए बजट की मांग की गई है।
इस साल देखे गए 1.83 लाख मरीज
सभी नौ होम्योपैथी अस्पतालों में इस साल 1,83,188 मरीज दिखाने के लिए आए। इनमें ग्रामीण क्षेत्र में 72,162 और शहरी अस्पतालों में 1,11,026 मरीज दिखाने आए। बताया गया कि इस साल दवाओं के लिए साढ़े छह लाख रुपये का बजट आया। उत्तर प्रदेश राज्य आयुष सोसाइटी से भी दवाएं उपलब्ध कराई गईं।
15 साल से स्वीकृत नहीं हुआ नया अस्पताल
2008 के बाद अब तक कोई भी नया होम्योपैथी अस्पताल स्वीकृत नहीं हुआ है। जबकि, जिला योजना की कई बैठकों में नगरा, हंसारी, नौ नंबर, राजगढ़, मोंठ, गुरसराय, गरौठा समेत अन्य इलाकों में 18 नए अस्पताल खोलने की मांग की जा चुकी है। बताया गया कि बुंदेलखंड में एक सरकारी होम्योपैथी मेडिकल कॉलेज की जरूरत है। ऐसे में छात्रों को पढ़ने के लिए या तो ग्वालियर के निजी संस्थान या फिर कानपुर के सरकार कॉलेज में प्रवेश लेना पड़ता है।
चिरगांव और कटेरा के अस्पताल के लिए होम्योपैथी विभाग के नाम पर भूमि आवंटित हो गई है। आयुष विभाग से निर्माण के लिए बजट की मांग की गई है। अस्पतालों में डॉक्टर और कर्मचारियों के रिक्त पद भी जल्द भरने की उम्मीद है। - डॉ. पूनम बुधरानी, प्रभारी जिला होम्योपैथी अधिकारी।