झांसी। गबन के करीब 33 साल पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश विजय कुमार वर्मा ने अमीन को दोषी मानते हुए उसकी सात साल की सजा बरकरार रखी है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता देवेंद्र पांचाल के मुताबिक तत्कालीन नायब तहसीलदार अच्छेलाल ने 26 मई 1989 को बबीना थाने में मदन मुरारी खरे पुत्र द्वारिका प्रसाद खरे के खिलाफ गबन के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके मुताबिक मदन मुरारी 24 नंवबर 1988 से 5 मई 1989 तक बबीना के घिसौली इलाके में तैनात था। इस दौरान ग्राम बड़ौरा से उन्होंने कुल 14,534 रुपये बैंक ऋण एकत्र किया लेकिन, इसे जमा नहीं कराया। इसी तरह आरोपी ने विभिन्न ग्रामीण इलाके में दर्जनों लोगों से रुपये एकत्रित किया लेकिन, यह पैसा भी जमा नहीं किया और फर्जी रसीदें बनाकर लोगों को दे दीं। विवेचना के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल कर दिया। इसे बाद 19 दिसंबर 2013 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने आरोपी को सात साल की सजा सुनाई। इसके बाद अभियुक्त ने अपील दाखिल की। इसे अपर सत्र न्यायाधीश ने खारिज करते हुए धारा 409 के तहत सात साल की सजा को बरकरार रखा।