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कोरोना काल भी नहीं रोक सका इनके कदम, ऐसे गुरुजनों को बारंबार नमन

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झांसी। वर्तमान में कोरोना काल चल रहा है। विद्यार्थियों के लिए स्कूल व कॉलेज बंद हैं। किसी विद्यार्थी के परिजन संक्रमण से जूझ रहे हैं तो कई के परिवार आर्थिक तंगी का सामना कर रहे हैं। इस दौर में भी शिक्षक आगे आकर अपना फर्ज निभा रहे हैं। जिनके पास संसाधन हैं उन्हें ऑनलाइन पढ़ा रहे हैं, किसी पर स्मार्टफोन, लैपटॉप नहीं है तो उसे सामान्य फोन के माध्यम से ज्ञान दे रहे हैं। जिनके पास सामान्य फोन भी नहीं है ऐसे छात्र-छात्राओं के लिए गांव की चौपाल या फिर पीपल, नीम के पेड़ के नीचे भी सामाजिक दूरी का पालन कराते हुए गुरुजी पढ़ा रहे हैं। कई अपनी जेब से विद्यार्थियों की फीस जमा कर रहे हैं। कुछ तो स्कूल से इतर सामाजिक उत्तरदायित्व का निर्वाह करते हुए आदिवासी बस्तियों और शिक्षा की रोशनी से दूर इलाकों में ज्ञान का दीप जला रहे हैं। अमर उजाला ने कोरोना काल में शिक्षा जगत में विशेष योगदान दे रहे और समाज को जागरूक कर रहे कुछ शिक्षकों की भूमिका को सराहा। देश के पूर्व राष्ट्रपति सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती पांच सितंबर शिक्षा दिवस के रूप में मनायी जाती है।
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