नगर निगम के एक बाबू की मनमानी से सफाई कर्मचारियों की भविष्य निधि अटक गई है। कर्मचारी लगातार भविष्य निधि की निकासी के लिए आवेदन कर रहे हैं, लेकिन भविष्य निधि खाते में गलत सूचनाएं भरे जाने से आवेदन अस्वीकार हो रहे हैं। इसके चलते सफाई कर्मचारियों और मृतकाश्रितों को दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। वहीं नगर निगम अधिकारी मामले की अनदेखी कर रहे हैं। दरअसल, नगर निगम में आउटसोर्स पर कार्यरत करीब 700 सफाई कर्मचारियों के वेतन से हर माह 1200 रुपये और 600 संविदा सफाई कर्मचारियों के खाते से 800 रुपये भविष्य निधि के नाम पर काटे जाते हैं। इस राशि को कर्मचारियों के भविष्य निधि खाते में जमा किया जाता है। कोरोना संक्रमण के दौरान सरकार ने भविष्य निधि खाते से कुछ राशि निकालने की छूट दी, तो करीब 50 सफाई कर्मचारियों ने पीएफ निकासी के लिए आवेदन किया। लेकिन सूचनाएं गलत होने से आवेदन अस्वीकार कर दिया गया। बताया जाता है कि सफाई कर्मचारियों के पीएफ खाता खोलने के आवेदन के दौरान आधार कार्ड, जन्म तिथि समेत तमाम सूचनाएं लिपिकों ने गलत दर्ज कर दी हैं। इसके चलते आवेदनों को वापस किया जा रहा है। नगर निगम के मृतक सफाई कर्मचारी की पत्नी मीना पिछले कई दिनों से पीएफ निकासी को भटक रही हैं, लेकिन उनके आवेदन की त्रुटि में सुधार नहीं हो पा रहा है। साथ ही अधिकारी उनको मृतकाश्रित के तौर पर नौकरी भी नहीं दे रहे हैं। सफाई कर्मचारी संघ के केशव वाल्मिकी ने बताया कि तमाम सफाई कर्मचारियों के पीएफ आवेदन वापस हो रहे हैं। इसे लेकर अधिकारियों को अवगत कराया गया है। लेकिन कोई सुनवाई नहीं की जा रही है। सफाई कर्मचारी लखन कुमार ने बताया कि पीएफ निकासी को आवेदन किया था, लेकिन आधार कार्ड गलत होने से आवेदन वापस कर दिया गया। अब कोई सुध नहीं ले रहा है।