- अचानक नहीं लेता कोई फैसला, पहले से बनने लगती हैं परिस्थितियां
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। आत्महत्या के नित नए मामले सामने आ रहे हैं। ज्यादातर में आत्महत्या का कारण व्यक्तिगत बताया जाता है, लेकिन हाल में बुंदेलखंड महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग द्वारा किए गए शोध में सामने आया है कि कोई भी व्यक्ति अचानक आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठाता। कहीं न कहीं उसके मन में पहले से हताशा का भाव रहता है, जो मानसिक बीमारी बन जाती है और किसी मौके पर वह अपनी जान दे देता है।
महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग ने आत्महत्या के बीस मामलों को अपने शोध में शामिल किया। ये सभी मामले वे थे, जिनमें आत्महत्या का कारण क्षणिक बताया गया था। किसी में बताया गया था पति से विवाद के बाद गुस्से में आकर पत्नी ने मौत को गले लगा लिया, तो किसी में परीक्षा में अच्छे नंबर न आने पर छात्र ने जान दे दी। शोध में सामने आया कि इन मामलों में जान देने का फैसला त्वरित आवेश में आकर नहीं लिया गया, बल्कि इसकी पटकथा मरने वाले के दिमाग में पहले से लिखी जा रही थी। महिला का पति से शादी के बाद से ही विवाद चल रहा था। वह पति के नशे की लत से बेहद परेशान थी। वह अपने और बच्चों के भविष्य को लेकर चिंतित रहती थी। परिवार के अन्य लोगों का भी उसे सहयोग नहीं मिल रहा था। पति से झगड़े के लिए सभी उसे ही दोषी ठहराते थे। इससे वह मानसिक बीमार हो चली थी और एक दिन उसने आत्मघाती कदम उठा लिया। इसी तरह छात्र के परिवार के लोगों की उससे अपेक्षाएं बढ़ी थीं, जिसके मुताबिक वह प्रदर्शन नहीं कर पा रहा था। घर में उसे ताने भी सुनने को मिलते थे। इसी हताशा में उसने अपनी जान दे दी। आत्महत्या के अन्य मामलों में भी इसी तरह के तथ्य सामने आए।
शोध में आत्महत्या के लिए समाज को भी जिम्मेदार ठहराया गया है, इसमें उल्लेख किया गया कि लोगों की अपेक्षाएं एक दूसरे से कुछ ज्यादा बढ़ गई हैं, जो पूरी न होने पर निराशा का भाव मन में घर कर जाता है। ऐसी परिस्थिति में परिवार और समाज के लोगों को आगे आना चाहिए। सहयोग की भावना रखते हुए आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए। एक दूसरे की क्षमता का आकलन कर उससे उतनी ही अपेक्षा करनी चाहिए। आपसी विवाद की स्थिति में किसी एक को अपने गुस्से पर काबू करना चाहिए।
00000000
फोटो
सामाजिक घटना होती है आत्महत्या
बुंदेलखंड महाविद्यालय के समाजशास्त्र विभाग के प्रोफेसर जितेंद्र तिवारी के अनुसार आत्महत्या व्यक्तिगत नहीं, बल्कि सामाजिक घटना होती है। शोध में भी यह सामने आ चुका है कि किसी एक व्यक्ति की आत्महत्या के लिए कहीं न कहीं उसके आसपास का समाज भी जिम्मेदार होता है। आत्महत्या के हालात लंबे समय से बनने लगते हैं। परिवार और समाज को ऐसे कारणों को दूर करने की कोशिश करनी चाहिए। विभाग ने आत्महत्या के 20 मामलों पर शोध किया था। इन सभी मामलों में मरने वालों की पुरानी परिस्थितियां आत्महत्या के लिए जिम्मेदार पाई गईं।
0000000
फोटो
आत्मबल से जीत हासिल करता है मनुष्य
ज्ञानी महेंद्र सिंह ने बताया कि मनुष्य को अपना आत्मबल मजबूत रखना चाहिए। आत्मबल से ही मनुष्य जीवन के हर मोर्चे पर जीत हासिल कर सकता है। बाकी, दुनिया में कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है, जिसके जीवन में तनाव न आता हो। तनाव दूर करने के लिए परमात्मा का ध्यान करना चाहिए। अच्छे लोगों के साथ बैठो और उनसे विचार-विमर्श करो। सकारात्मक सोच और चिंतन से जीवन में खुशहाली आती है। मनुष्य के जीवन में सहनशीलता और धैर्य बेहद जरूरी है।