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Jhansi News: लखनऊ-चेन्नई एक्सप्रेस पर पथराव, जनरल कोच को बनाया निशाना, दो यात्री घायल

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यात्रियों में मची अफरा-तफरी
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अमर उजाला ब्यूरो



झांसी। लखनऊ से चलकर चेन्नई जा रही लखनऊ-चेन्नई एक्सप्रेस पर उरई स्टेशन के पास ट्रैक किनारे खड़े युवकों ने पथराव कर दिया। इन लोगों ने जनरल कोच को निशाना बनाया। खिड़की के किनारे बैठे दो यात्री पत्थर लगने से घायल हो गए हैं। इससे कोच में अफरातफरी मच गई। घायल यात्रियों का इलाज झांसी के वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन पर कराया गया। इसके बाद ही ट्रेन अपने गंतव्य के लिए रवाना हुई।

लखनऊ-चेन्नई एक्सप्रेस के जनरल कोच पर पथराव की यह घटना बृहस्पतिवार रात को करीब 9-30 की बताई जा रही है। यात्रियों का कहना है कि जैसे ही गाड़ी उरई स्टेशन से थोड़ा आगे निकली तभी ट्रैक के किनारे खड़े आठ-दस युवकों ने अचानक पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। पत्थर लगने से खिड़की के पास बैठे लखनऊ निवासी युवक मोहित (21) और अखिलेश (22) घायल हो गए। मोहित चेन्नई और अखिलेश चंद्रपुर जा रहा था। पथराव की वजह से कोच में मौजूद यात्री सहम गए। यात्रियों ने घटना की सूचना कंट्रोल रूम को दी। गाड़ी के झांसी स्टेशन पहुंचने पर डिप्टी एसएस एसके नरवरिया के साथ मौजूद रेलवे अस्पताल की टीम ने दोनों यात्रियों का उपचार किया। आरपीएफ और जीआरपी द्वारा दोनों से घटना के संबंध में जानकारी की गई। इसके बाद दोनों को गाड़ी में बैठाकर गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया।
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घायलों के साथ 25 मिनट आउटर पर खड़ी रही ट्रेन



झांसी। पथराव से दो युवकों के घायल होने की सूचना मिलने के बाद झांसी के वीरांगना लक्ष्मीबाई स्टेशन पर रेलवे अस्पताल की टीम गाड़ी आने के समय पर प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुंच गई थी। लेकिन, एक नंबर पर पहले से ही छपरा एक्सप्रेस खड़ी हुई थी। इससे 6094 लखनऊ-चेन्नई एक्सप्रेस को 25 मिनट तक खड़ा रखा गया। रात 10.26 बजे छपरा एक्सप्रेस के रवाना होने के बाद 10.37 बजे लखनऊ-चेन्नई एक्सप्रेस प्लेटफार्म पर आई। इसके बाद दोनों युवकों का इलाज किया गया। इलाज मिलने में हुई देरी पर कोच में सवार सह यात्रियों ने खासी नाराजगी जताई।
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वंदे भारत पर तीन महीने पर 35 बार चले पत्थर



झांसी। भोपाल के रानी कमलापति स्टेशन से हजरत निजामुद्दीन तक के लिए वंदे भारत एक्सप्रेस की शुरुआत एक अप्रैल को हुई थी। इसके बाद से ही लगातार इस ट्रेन पर पथराव हो रहा है। खासतौर पर आगरा से मथुरा के बीच गाड़ी पर पत्थर फेंके जाते हैं। तीन महीने में इस गाड़ी पर पत्थरबाजी की 35 घटनाएं हो चुकी हैं। गनीमत रही कि इससे कोई यात्री घायल नहीं हुआ। हालांकि, ट्रेन की खिड़कियों के शीशे जरूर क्षतिग्रस्त हो गए, जिन्हें बदला गया।
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