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स्टेशन ब्रांडिंग की कंपनियों को नहीं मिली इजाजत, रेलवे बोर्ड ने लगाई रोक

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झांसी। रेल स्टेशनों के नाम के साथ कंपनियों के नाम जोड़े जाने के प्रस्ताव को आखिरकार रेलवे बोर्ड ने मंजूरी देने से इंकार कर दिया। जिन स्टेशनों के लिए टेंडर कराए जा चुके, उनको टेंडर निरस्त करने को कहा गया है। इस फैसले से मंडल रेल अफसरों को झटका लगा है। झांसी रेल मंडल के स्टेशनों के लिए निविदा निकाले जाने की तैयारी थी।
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रेलवे की को-ब्रांडिंग योजना के मुताबिक रेल स्टेशनों के नाम के साथ कंपनियां अपना नाम जोड़ सकती थीं। जहां-जहां भी रेल स्टेशन का नाम लिखा रहेगा वहां उसके साथ कंपनी भी नाम दर्ज करा सकती है। इसके लिए एंट्री प्वांइट से लेकर अन्य कई स्थल भी चिन्हित किए गए थे। रेलवे बोर्ड की योजना गैर टिकट से कमाई बढ़ाने की थी लेकिन, इस योजना के सार्वजनिक होते ही बोर्ड की आलोचना आरंभ हो गई। सोशल मीडिया पर रेलवे की काफी भद पिटी। कई कंपनियों के विचित्र नाम के साथ स्टेशन का नाम जोड़कर लोगों ने ढेरों मीम वायरल कर दिए। इसके बाद रेलवे को अपने फैसले पर पुनर्विचार करना पड़ा। रेल अफसरों के मुताबिक रेलवे बोर्ड का आदेश झांसी भी पहुंच गया। झांसी मंडल में इस योजना से करीब पचास लाख कमाई का अनुमान लगाया गया था यहां टेंडर की तैयारी भी हो गई थी लेकिन, बोर्ड का फैसला आने के बाद अंतिम समय पर इसे रोक देना पड़ा।
नाम को लेकर पहले ही विवादों में घिर चुका रेल प्रशासन
झांसी रेलवे स्टेशन का नाम बदलने के दौरान बरती गई लापरवाही को लेकर रेल प्रशासन पहले भी विवादों में घिर चुका। झांसी स्टेशन का नाम बदलकर वीरांगना लक्ष्मीबाई कर दिया गया लेकिन, बाद में अचानक से स्टेशन के नाम के साथ झांसी जोड़ दिया गया। इस संबंध में आदेश अभी तक स्थानीय रेल अफसरों को नहीं मिला है।
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