महानगर के घर- घर पानी पहुंचाने के लिए माताटीला बांध से डाली जा रही नई पाइपलाइन के लिए पीने और सिंचाई के लिए पानी की कोई समस्या सामने नहीं आएगी। अभी बांध में पीने के लिए 150 एमएलडी (15 करोड़ लीटर) पानी आरक्षित है, जिसमें से 120 से 130 एमएलडी पानी अभी लिया जा रहा है। 2022 में महायोजना के पूरे होने के बाद शुरूआत में 40 एमएलडी (चार करोड़ लीटर) पानी की आवश्यकता और पड़ेगी। ऐसे में तीन हजार हेक्टेयर खेती में पड़ने वाली पानी की कमी को स्प्रिंकलर पद्दति से पूरा किया जाएगा। इसके लिए प्रायोगिक तौर पर तैयारी शुरू हो गई है। दूसरे चरण में माताटीला बांध से झांसी तक उच्च क्षमता की पाइपलाइनों से पानी लाया जाना है। इस चरण के काम को 600.42 करोड़ में पूरा होना है, जिसमें अभी तक 85 करोड़ रुपये जलनिगम को मिल चुके हैं। दूसरे चरण का काम इस्राइल की तहल कंपनी ने शुरू कर दिया है। बबीना में जलशोधन प्लांट बनना शुरू हो गया है। साथ ही, पाइपलाइन भी डलने लगी है। उक्त नई पाइपलाइन के जरिये 2022 तक महानगर तक पानी लाने का लक्ष्य बनाया गया है। इस लाइन के चालू होने पर प्रतिदिन 40 एमएलडी पानी की आवश्यकता और पड़ेगी। हालांकि, पीने के लिए इतना पानी निकलने के बाद तीन हजार हेक्टेयर जमीन को सिंचाई के लिए पानी कम पड़ेगा। सिंचाई विभाग इस कमी को पूरा करने के लिए स्प्रिंकलर खेती को बढ़ावा देने की तैयारी कर रहा है। इसके प्रयोग शुरू कर दिए गए हैं। स्प्रिंकलर खेती में 70 फीसदी पानी की बचत होती है। ये होता है स्प्रिंकलर स्प्रिंकलर (फव्वारा पाइप) सिंचाई का एक उपकरण है, जिसका उपयोग कृषि फसलों, लॉन, गोल्फ कोर्स और अन्य क्षेत्रों में सिंचाई के लिए किया जाता है। स्प्रिंकलर सिंचाई वर्षा के समान नियंत्रित तरीके से पानी लगाने की विधि है। इसमें खेतों के बीच से पाइप डाल जाते हैं, जिनके बीच में लगे स्प्रिंकलर से पानी चारों तरफ फैलता है। - स्प्रिंकलर खेती के लिए प्रयोग शुरू कर दिए गए हैं। इसमें 70 फीसदी पानी की बचत होगी। इस प्रयोग के सफल होने पर माताटीला बांध में सिंचाई के पानी की कमी नहीं पड़ेगी। केबी लाल, मुख्य अभियंता सिंचाई विभाग।