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Jhansi News: कलेजे के टुकड़े की राह देखते पथराईं आंखें, बाल गुमशुदा दिवस पर विशेष

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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। यह दर्द उन मां-बाप का है, जिनके बच्चे किसी न किसी वजह से गुमशुदा हो गए। उनकी तलाश में मां-बाप रेलवे स्टेशन से लेकर पुलिस थानों के चक्कर काट रहे हैं। झांसी में औसतन हर माह 15-20 बच्चे लापता होते हैं। पुलिस के मुताबिक कई बच्चे मिल जाते हैं लेकिन, कई बच्चे ऐसे भी हैं, जिनको कई साल बीत जाने के बाद भी पुलिस अब तक तलाश नहीं सकी। अपने कलेजे के टुकड़े की राह देखते-देखते इनके आंखें भी पथरा गईं। जनपद में लापता होने वाले बच्चों को खोजने के लिए ऑनलाइन प्लेटफार्म भी तैयार हुआ लेकिन, यह अधिक कारगर साबित नहीं हो रहा। नतीजतनलोग आज भी अपनों की तलाश में थाने और चौकियों से लेकर अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं। कोतवाली व थानों पर लगे नोटिस बोर्ड पर ही गुमशुदगी की तलाश की जा रही है। वहीं, एसपी सिटी ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि लापता बच्चों की तलाश के लिए अलग से टीम लगाई जाती है। पुलिस टीम ने कई बच्चों को बरामद किया है।
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