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स्लीपर वंदे भारत : क्या हुआ जब बोरियों से लदी ट्रेन की चढ़ाई पर आजमाई ताकत

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संवाद न्यूज एजेंसी
झांसी। कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक दुर्गम घाटियों में भी फर्राटा भरने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस का दूसरा अवतार स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस है। लंबी दूरी तय करने के लिए तैयार की गई स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस का ट्रायल चौथे दिन भी हुआ। इस दौरान ट्रेन ने शक्ति प्रदर्शन किया। ट्रेन को ऊंचाई पर ले जाया गया और फिर वहां से नीचे की ओर चलाया गया। इस दौरान इंजन की शक्ति को परखा गया। दिल्ली-मुंबई रेलमार्ग की कसारा घाटी से जब भी कोई ट्रेन गुजरती है तो उसे संभालने के लिए पीछे से एक इंजन और जोड़ा जाता है। रेलवे ऐसी ही घाटियों में भी स्लीपर वंदे भारत एक्सप्रेस चलाने की योजना पर काम कर रहा है। इन्हीं दुर्गम रेलमार्गों को ध्यान में रखते हुए आरडीएसओ (रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन) देश की पहली स्लीपर वंदे भारत को लेकर झांसी मंडल के खजुराहो-महोबा रेलखंड में ट्रायल के लिए लाया गया है। आरडीएसओ के अधिकारियों ने चौथे दिन ट्रेन की शक्ति को परखा। ट्रेन को पहले ईसानगर क्षेत्र की चढ़ाई पर ले जाया गया, जहां उसके इंजन की ताकत का आंकलन किया गया। रेल अधिकारियों की माने तो इस परीक्षा को भी वंदे भारत एक्सप्रेस ने पास कर लिया है।

24jjrp15- बेरी। कार्यक्रम को संबोधित करते इंद्रेश कुमार। स्त्रोत- आयोजक- फोटो : udhampur

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