कभी जमीन को लेकर तो कभी निर्माण को लेकर विवादों में घिरा रहने वाला बहुमंजिली बिल्डिंग स्काई टावर अब आयकर विभाग के निशाने पर आ गई है। आयकर विभाग द्वारा छापेमारी के दौरान की गई पड़ताल में सामने आया कि इस बिल्डिंग में तमाम लोगों की रकम लगी हुई है। इसके सुबूत भी आयकर विभाग के हाथ लगे हैं। ऐसे में जांच का दायरा और बढ़ने की संभावनाएं जताई जा रही हैं।
क्रिश्चियन इंटर कॉलेज के परिसर में सात साल पहले 18 मंजिला बिल्डिंग का निर्माण शुरू किया गया था। शुरुआत में इसका नाम ऊं शांति हाइट्स रखा गया था। लेकिन, बाद में इसे स्काई टावर नाम दे दिया गया था। पुलिस लाइन से सटकर बनाई जा रही यह बिल्डिंग विवादों में घिरी रही। पहले इसकी जमीन को लेकर विवाद हुआ। क्रिश्चियन समुदाय की जिस संस्था से जमीन खरीदी गई थी, उस संस्था पर इस जमीन का मालिकाना हक ही न होने के आरोप लगे थे।
ये आरोप क्रिश्चियन समुदाय की दूसरी संस्था की ओर से लगाए गए थे। जेडीए और स्थानीय प्रशासन के पास भी खूब शिकायतें पहुंची थीं। इसके बाद कुछ समय के लिए निर्माण भी बंद हो गया था। बैंकों ने भी फाइनेंस से हाथ पीछे खींच लिए थे। हालांकि, बाद में काम शुरू हो गया था। फ्लैटों की बिक्री जारी है। अब यह टावर आयकर विभाग के निशाने पर आ गया है।
पड़ताल में सामने आया है कि टावर में एक बिल्डर की 50 फीसदी की पार्टनरी है, जबकि दो अन्य बिल्डर इसमें 25-25 प्रतिशत के पार्टनर हैं। लेकिन, इन तीनों बिल्डरों ने अपनी-अपनी हिस्सेदारी में तमाम लोगों का पैसा लगा रखा है। इसके सुबूत भी आयकर के हाथ लगे हैं। इसके साथ ही आईटी ने पड़ताल का दायरा बढ़ा दिया है।