झांसी। बस संख्या यूपी 93-टी 0413। उरई डिपो की इस बस को उरई से लेकर झांसी तक हर कोई पहचान गया है। इस रूट पर यात्रा करने वाले लोग तो अब इस बस को भी पति पत्नी की बस के नाम से जानने लगे हैं। दरअसल रोडवेज की इस बस पर पति ड्राइवर है और पत्नी कंडक्टर है। यह दोनों इस बस को रोज झांसी से उरई लेकर जाते हैं और उरई से झांसी आते हैं। इनका कहना है कि दोनों एक दूसरे के मददगार बनकर काम करते हैं।
जालौन जिले के मुहल्ला गणेश जी में रहने वाली संगीता ने बताया कि उनका विवाह सुरेंद्र सिंह राठौर से 1996 में हुआ था। उन्होंने उरई से एमए तक की पढ़ाई की है। इसके बाद 2019 में उरई डिपो में परिचालक के पद पर चयन हो गया। शुरू में बस के संचालन के दौरान कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ा। कई दिनों तक ड्यूटी नहीं मिलती थी। क्योंकि कोई भी बस ड्राइवर साथ में चलने को राजी नहीं था, जो भी ड्राइवर बस में मिलता था वह अतिरिक्त पैसों की मांग करता, बताया कि पैसे नहीं देने पर साथ चलने से मना कर देता। जिसके कारण कई महीनों तक संगीता देवी का सफर कठिनाइयों भरा रहा। तय लक्ष्य की पूर्ति नहीं कर पाने के कारण कई बार नोटिस भी मिले। एक बार ऐसी स्थिति आई कि संगीता नौकरी छोड़ने को मजबूर हो गईं थी। मजबूर पत्नी की हालत देख पति सुरेंद्र जो निजी बसों में ड्राइविंग करते थे उन्होंने भी रोडवेज में चालक के लिए आवेदन किया और 2020 में संविदा पर नियुक्ति मिल गई। रोडवेज के अफसरों ने भी दोनों को एक ही बस पर तैनाती दे दी। तब से लेकर आज तक दोनों एक ही बस में सेवाएं दे रहे हैं।
कोरोना काल में दी गईं सेवाओं पर हो चुके सम्मानित
झांसी। कोरोना काल में बेहतरीन सेवा देने के लिए रोडवेज की तरफ से कंडक्टर संगीता राठौर को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया जा चुका है। बताया कि जब ट्रेनें बंद हो गईं थीं, तब रोडवेज बस ही एकमात्र यात्रियों के लिए सफर करने का माध्यम था। उस दौरान बिना छुट्टी लिए लगातार रोडवेज की सेवाएं दीं। इस दौरान कोरोना संक्रमित हो चुकी थीं, उनको 15 दिनों के लिए क्वारंटीन भी किया गया। लेकिन पति सुरेंद्र ने इसके बाद भी गैर जनपद में फंसे छात्रों को लाने के लिए सेवाएं जारी रखी। उनकी इसी लगन को देखकर अब विभाग भी खुश है।
दादा - दादी बच्चों की करते हैं देखरेख
झांसी। कंडक्टर संगीता और सुरेंद्र के पास चार बेटियां और एक बेटा है। जिनकी देखरेख उनके दादा-दादी करते हैं। संगीता ने बताया कि दो बेटियों की शादी कर चुकी हैं। और दो बेटी और एक बेटे की पढ़ाई लिखाई जालौन के एक स्कूल से करा रही हैं। सफर के दौरान बच्चों की जिम्मेदारी दादा - दादी करते हैं।