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Jhansi News: छात्रसंघ की सियासत से उच्च सदन तक पहुंचे बाबूलाल

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झांसी। एमएलसी निर्वाचित होने वाले डा. बाबूलाल तिवारी ने अपने सियासी सफर की शुरुआत छात्र राजनीति से की थी। 37 साल पहले वे बुंदेलखंड महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष बने थे। हालांकि, इसके बाद उन्होंने विधानसभा और विधान परिषद के तीन चुनाव लड़े थे, लेकिन इन तीनों चुनावों में उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। पहली बार वह उच्च सदन में पहुंचने में कामयाब हुए हैं।
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बाबूलाल तिवारी ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के टिकट पर 1986 में बुंदेलखंड महाविद्यालय के छात्रसंघ अध्यक्ष का चुनाव जीता था। इसके बाद से वह सियासत में लगातार सक्रिय बने रहे। 1989 में उन्होंने भाजपा के टिकट पर बांदा की नरैनी विधानसभा से चुनाव लड़ा था, परंतु वे इस चुनाव में सफल नहीं हो पाए थे। जबकि, साल 2008 व 2014 में उन्होंने एमएलसी की स्नातक सीट से चुनाव लड़े थे और दोनों ही बार वे दूसरे स्थान पर रहे थे।
अपने सियासी सफर में बाबूलाल बुंदेलखंड विश्वविद्यालय शिक्षक संघ की राजनीति में भी जमकर सक्रिय रहे। बांदा में भाजपा युवा मोर्चा के जिलाध्यक्ष रहे तो झांसी में भाजपा के नगर महामंत्री भी रहे। इसके अलावा बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा व अन्य संगठनों से भी उनका जुड़ाव बना रहा।
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बीकेडी में पढ़े, प्राचार्य बने और एमएलसी बनकर निकले
झांसी। बाबूलाल तिवारी ने उच्च शिक्षा बुंदेलखंड महाविद्यालय से हासिल की। इसी दरम्यान वे यहां से छात्रसंघ अध्यक्ष बने थे। पढ़ाई पूरी करने के बाद वे इसी कॉलेज में शिक्षक हो गए थे और बाद में प्राचार्य बने। लगभग दस साल तक वे बुंदेलखंड महाविद्यालय के प्राचार्य रहे। हाल ही में 30 जून 2022 को वह सेवानिवृत्त हुए। यह भी इत्तेफाक रहा है कि बुंदेलखंड महाविद्यालय में बनाए गए मतगणना स्थल से ही वह शुक्रवार को एमएलसी निर्वाचित होकर निकले।
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