लॉकडाउन में राजधानी स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू होते ही ई टिकट बनाने वाले अवैध दलाल भी सक्रिय हो गए हैं। बुधवार को मुख्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर आरपीएफ डिटेक्टिव विंग ने चित्रा चौराहा व इलाइट पर स्थित साइबर कैफे की जांच की। जांच में सब ठीक पाया गया। लॉकडाउन के चलते अधिकांश दुकानें बंद पाई गईं। कोरोना वायरस के चलते रेलवे ने 23 मार्च से ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बंद कर रखा है। लॉकडाउन में दूसरे शहरों में फंसे लोगों को राहत देने के लिए 12 मई से स्पेशल ट्रेनों का संचालन शुरू किया गया, जो अब 30 जून तक जारी रहेगा। इन ट्रेनों में भी ऑनलाइन टिकटों की बुकिंग की जा रही है। इन ट्रेनों में यात्री सात दिन तक का अग्रिम टिकट बुक करा सकते हैं। पहले दिन ही 12 मई की शाम में आईआरसीटीसी की साइट खुलते ही 54 हजार यात्रियों ने महज छह घंटे के अंदर टिकट बुक कराए थे। चूंकि, अधिकांश यात्री ऑनलाइन टिकट नहीं बना पाते हैं, इस कारण लोगों को आईआरसीटीसी के एजेंट का सहारा लेना पड़ता है। इनमें ही कुछ एजेंट व अनाधिकृत लोग दूसरे की आईडी पर ई टिकट बनाना शुरू कर देते हैं, जो अपराध की श्रेणी में आता है। ई टिकट के अवैध कारोबार पर नजर रखने के लिए आरपीएफ ने जांच शुरू कर दी है। बुधवार को उत्तर मध्य रेलवे के मुख्य सुरक्षा आयुक्त के निर्देश पर आरपीएफ डिटेक्टिव विंग ने चित्रा चौराहा स्थित बालाजी टूर एंड ट्रैवल्स व इलाइट चौराहा स्थित रिया कंप्यूटर्स साइबर कैफे की जांच की। यहां लगे कंप्यूटरों की जांच में सब ठीक पाया गया। जांच में पता चला कि साइबर कैफे संचालक फिलहाल ई टिकट नहीं बना रहे हैं।