- कचहरी परिसर में दिन भर बनी रही गहमागहमी
अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत की वजह से कचहरी परिसर में सुबह से शाम तक वकीलों व वादकारियों की भीड़ रही। एक ही दिन में 1,16,484 मुकदमों का निस्तारण हुआ, जो अब तक का रिकॉर्ड है। अदालतों में मुकदमों का निपटारा आपसी सुलह- समझौते के आधार पर किया गया।
पिछली बार हुई राष्ट्रीय लोक अदालत में 1,02,763 मुकदमों का निस्तारण किया गया था, जो उस समय तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था। न्यायिक अमले ने शनिवार को एक ही दिन में 1,16,484 मुकदमों का निस्तारण कर नया कीर्तिमान स्थापित किया। विभिन्न अदालतों की ओर से निस्तारित किए गए मामलों में 7.67 करोड़ रुपये की धनराशि प्रतिकर के रूप में देने के आदेश पारित किए गए। इससे पूर्व लोक अदालत का शुभारंभ जनपद न्यायाधीश व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष पदम नारायण मिश्र ने किया। इस मौके पर न्यायिक अधिकारी ललित नारायण झा, विशेष शर्मा, आनंद प्रकाश तृतीय, शरद कुमार चौधरी समेत जिला अधिवक्ता संघ के अध्यक्ष चंद्रशेखर शुक्ला, सचिव केपी श्रीवास्तव आदि मौजूद रहे।
केस-1
पांच साल पुराना मुकदमा पांच मिनट में निपटा
चार लाख चार हजार रुपये के लेनदेन में दी गई चेक के बाउंस होने पर साल 2019 में मुकदमा न्यायालय में दायर किया गया था। पिछले पांच साल के दरम्यान मुकुल बनाम रामनरेश के मुकदमे में 73 तारीखें दी गईं, परंतु मामले का निस्तारण नहीं हो पाया। ऐसे में मुकदमे को लोक अदालत में लाया गया, जिसमें महज पांच मिनट में ही आपसी सुलह-समझौते के आधार पर मुकदमा निस्तारित कर दिया गया। अधिवक्ता निर्देश द्विवेदी ने बताया कि अदालत के फैसले पर वादी-परिवादी दोनों ने संतोष जताया।
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12 साल बाद मारपीट के मामले में हुआ समझौता
चिरगांव थाने में साल 2012 में मारपीट का मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया था। सरकार बनाम बल्लू के इस मुकदमे के दौरान कई तारीखें पड़ीं, लेकिन मामला निस्तारित नहीं हो पाया। मामले को राष्ट्रीय लोक अदालत में लाया गया। अधिवक्ता रविशंकर पांडेय ने बताया कि लोक अदालत में मुकदमा दोनों पक्षों के बीच हुई आपसी सुलह के आधार पर निस्तारित कर दिया गया।