लॉकडाउन के बाद से ही ट्रेनों की आवाजाही पर ब्रेक लगा हुआ है। यात्री ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बंद है। ऐेसे में रेलवे को प्रतिदिन तगड़ा झटका झेलना पड़ रहा है। इस घाटे को उबारने के लिए रेलवे बोर्ड के आदेश पर रेलवे ने डीजल के स्थान पर इलेक्ट्रिक इंजन से मालगाड़ी का संचालन करा रहा है।
लॉकडाउन के बाद से ही ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बंद है। केवल आवश्यक माल ढुलाई के लिए मालगाड़ियों का ही संचालन किया जा रहा है। झांसी मंडल से भी करीब 60 से 70 मालगाड़ियां संचालित हो रही हैं। रेलवे बोर्ड ने घाटे से रेलवे को उबारने के लिए रेलवे को डीजल के स्थान पर इलेक्ट्रिक इंजनों से ही मालगाड़ियाें के संचालन के निर्देश दिए हैं। झांसी मंडल में इलेक्ट्रिक इंजनों से ही मालगाड़ियाें का संचालन हो रहा है, लेकिन कुछ स्थानों पर इलेक्ट्रिक इंजनोें से मालगाड़ी चल रही हैं। रेलवे बोर्ड का आदेश मिलने के बाद झांसी मंडल ने भी इक्का-दुक्का चलने वाली मालगाड़ियों को इलेक्ट्रिक इंजन से चलाना शुरू कर दिया है। झांसी मंडल में प्रतिदिन करीब 76 हजार लीटर की खपत हो रही थी, लेकिन इस खपत को बीस हजार लीटर में तब्दील कर रेलवे प्रतिदिन 40 से 45 लाख रुपये की बचत कर रहा है।
मंडल में चार प्वाइंटों से भरता है डीजल
झांसी मंडल में इंजन में डीजल भरने के लिए चार प्वाइंट बने हुए है। झांसी स्टेशन पर दो प्वाइंट, ग्वालियर व बांदा में एक-एक प्वाइंट है। यहां से प्रतिदिन मालगाड़ियों में डीजल भरा जाता है। इसी तरह तरह तीन स्टेशन के चार प्वाइंट से डीजल इंजनों में डीजल भरा जाता है।
लॉकडाउन से पहले करीब 76 हजार लीटर डीजल की प्रतिदिन खपत होती थी। अब प्रतिदिन खपत बीस लीटर पर आकर रह गई है। झांसी मंडल में लगभग 90 प्रतिशत संचालन इलेक्ट्रिक से होता है। मंडल के सभी प्रमुख रूट धौलपुर-बीना, झांसी-मानिकपुर व झांसी कानपुर इलेक्ट्रिकल हैं।
मनोज कुमार सिंह, जनसंपर्क अधिकारी