रेलवे पिछले 20 दिन में मंडल के अलग- अलग स्टेशनों पर पंद्रह हजार से अधिक टिकटों को निरस्त कर दो करोड़ रुपये से अधिक लौटा चुका है। टिकट निरस्त कराने वालों की अभी भी लाइन लगी हुई है। कोरोना वायरस के चलते रेलवे ने 23 मार्च से मेल, एक्सप्रेस व पैसेंजर ट्रेनों का संचालन पूरी तरह बंद कर रखा है। तीस जून तक सिर्फ स्पेशल ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है। चूंकि, रेलवे 120 दिन पहले से ट्रेनों में टिकट बुक करना शुरू कर देता है। इस कारण अप्रैल से जुलाई तक के लिए बड़ी संख्या में यात्रियों ने जनवरी और फरवरी में टिकट बुक करा लिए थे। इनमें कोई गर्मी की छुट्टियों में घूमने तो कोई बच्चों के साथ घर वापस लौट रहा था। कोई कारोबार के सिलसिले में बाहर जाने वाला था तो कोई पढ़ाई के लिए। इन सब यात्रियों को झांसी स्टेशन से ट्रेन पकड़नी थी, जो झांसी महानगर व बुंदेलखंड के अलग- अलग हिस्सों में रहते हैं। रेलवे ने 22 मई से 23 मार्च के बाद बने आगामी तिथियों के आरक्षित टिकटों का रिफंड लौटाना शुरू कर दिया था। अभी तक रेल मंडल में पंद्रह हजार से अधिक टिकटों को कैंसल कर दो करोड़ रुपये से अधिक लौटाए जा चुके हैं। ये टिकट झांसी, ग्वालियर, दतिया, डबरा, ललितपुर, बबीना, महोबा, बांदा, उरई, पुखरायां, चित्रकूट, खजुराहो स्टेशन से निरस्त किए गए। प्रतिदिन झांसी रेलवे स्टेशन से औसत 120 ट्रेनें गुजरतीं हैं। यह ट्रेनें बीना, इलाहाबाद, कानपुर और आगरा की तरफ जाने वाले ट्रैक पर दौड़तीं हैं। इन ट्रेनों में प्रतिदिन झांसी से सामान्य दर्जे में औसत 20 हजार और आरक्षित कोचों में करीब पांच हजार मुसाफिर सफर करते हैं।