रेलवे कालॉनी में बने 2300 से अधिक क्वार्टरों में रहने वाले सत्तर फीसदी कर्मचारी विभिन्न समस्याओं से जूझ रहे हैं। यहां न तो समुचित सफाई की जा रही है और न ही स्वच्छ जलापूर्ति हो पा रही है। अधिकांश क्वार्टरों के दरवाजे और खिड़कियां टूटे हुए हैं। ऐसे में कर्मचारियों का यहां रहना मुहाल हो गया है। दरअसल, रेल प्रशासन पूर्वी कॉलोनी में बने अफसरों के ढाई सौ बंगलों के रखरखाव का तो पूरा ध्यान रखता है, मगर पश्चिमी कॉलोनी में रहने वाले कर्मचारियों के क्वार्टरों के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया जाता है। ऐसा नहीं कि रेल कर्मचारी यूनियनें इस मुद्दे को नहीं उठाती हैं, मगर यूनियन से जुड़े कर्मचारियों के क्वार्टरों का समय से रखरखाव कर उन्हें भी चुप करा दिया जाता है। ऐसे में सामान्य कर्मचारियों के लिए यहां-वहां चक्कर काटने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता है। कर्मचारियों के लिए कार्य निरीक्षक को तलाशना भी मुश्किलों भरा रहता है। चूंकि, कर्मचारियों को रेलवे में ही रहकर नौकरी करनी है, इस कारण वह अपना दर्द किसी को बयां नहीं कर पाते हैं। कालोनी में यह भी समस्याएं - झाड़ियों की सफाई न होने से गाजर घास ने हर जगह पैर पसार लिए हैं। - कॉलोनी की नालियां और नाले गंदगी से बजबजा रहे हैं। - पानी भी पीला और गंदा आ रहा है। कर्मचारियों को आरओ का पानी पीना पड़ रहा है। - क्वार्टरों में लगी टंकियों तक सीधा पानी पहुंचाने की व्यवस्था नहीं। - 50 फीसदी क्वार्टरों के दरवाजे टूटे और खिड़कियों में मच्छर जाली नहीं। - अधिकांश क्वार्टरों में बरसात के दिनों में पानी टपकता है। - कॉलोनी के सभी प्रमुख सड़कों पर गड्ढे ही गड्ढे नजर आ रहे हैं।