अमर उजाला ब्यूरो
झांसी। बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (बीडा) के लिए शुक्रवार को जमीन के बैनामों की प्रक्रिया शुरू हुई। पहले दिन पांच बैनामे हुए, जिनके जरिये 40 एकड़ जमीन खरीदी गई। जमीन खरीदने की कार्यवाही की शुरुआत ग्राम सारमऊ से हुई। इसके बाद ग्राम अंबावाय की जमीन खरीदी जाएगी।
नोएडा की तर्ज पर झांसी में औद्योगिक शहर बीडा विकसित किया जा रहा है। यह झांसी सदर तहसील के 33 गांवों में बनाया जा रहा है। इसके लिए 14,225 हेक्टेअर जमीन चिह्नित की गई है। बीडा बोर्ड की ओर से चिह्नित जमीन के बैनामों की प्रक्रिया पिछले एक महीने से जारी है। चिह्नित जमीन पर लोगों से लगातार आपत्तियां मांगी जा रही हैं, जिनका राजस्व विभाग की ओर से निस्तारण किया जा रहा है। बीडा के लिए सबसे पहले जमीन ग्राम सारमऊ की ली जा रही है। सारमऊ में 765 गाटा संख्या की जमीन ली जानी है, जिसमें 3168 सह खाताधारक हैं, जबकि किसानों की संख्या 800 है। शुक्रवार को पहली बार बीडा के लिए जमीन के बैनामे हुए। सारमऊ के काश्तकार याकूब अहमद मंसूरी, बृजलाल, पुष्पा, ज्योति व अरुण समेत तीन सहखाताधारकों ने अपनी 40 एकड़ जमीन के बीडा के पक्ष में बैनामे किए। सभी किसानों को जमीन के सर्किल रेट से चार गुना दाम दिए गए। बैनामों के बाद आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान की प्रक्रिया शुरू की गई। पैसा काश्तकारों के बैंक खातों में भेजा जाएगा। बैनामों के बाद सभी काश्तकारों का राजस्व विभाग की ओर से हार-माला पहनाकर अभिनंदन किया गया। इस मौके पर सहायक महानिरीक्षक निबंध प्रवीण सिंह, तहसीलदार सदर, ललित पांडेय, सब रजिस्ट्रार सुभाष चंद्र आदि मौजूद रहे।
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सब रजिस्ट्रार कार्यालय में हुए बैनामे
काश्तकारों को जमीन के बैनामों के लिए पुरानी तहसील में स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालय न आना पड़े, इसके लिए सारमऊ के पंचायत भवन में अस्थायी तौर पर सब रजिस्ट्रार कार्यालय बनाया गया था। लेकिन, यहां तकनीकी खामी आने की वजह से बैनामे नहीं हो पाए। ऐसे में शाम को सभी काश्तकारों को पुरानी तहसील स्थित सब रजिस्ट्रार कार्यालय लाया गया। देर रात तक यहां बैनामों की प्रक्रिया जारी रही। जमीनों के बैनामे ई-स्टांप की जगह कागजी स्टांप पर हुए।
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