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खुदा एवं बंदे के बीच इबादत का जरिया सूफी: पूरनचंद वडाली

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झांसी महोत्सव में सोमवार को मुक्ताकाशी मंच पर अपनी आवाज का जादू बिखेरते वडाली ब्रदर्स।
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वडाली बंधुओं में सीनियर वडाली पूरनचंद ने सूफी गायन को आने वाले समय के लिहाज से चुनौतीपूर्ण बताया है। उनका कहना है नई संगीत विधाओं से तगड़ी चुनौती है। सूफी के लिए नई पीढ़ी के लोग कम सामने आ रहे। अमर उजाला के संग खास बातचीत में उन्होंने अपनी बात समझाते हुए कहा हमारा मकसद पैगाम देना है, साज सुनाना नहीं। सूफी गायन खुदा एवं बंदे के बीच इबादत का जरिया है, इसके भीतर इतनी ताकत है कि वह इससे निपट सकेगा। जोड़ीदार प्यारेलाल वडाली के निधन से खाली हुई जगह को भरने में लखविंदर की भूमिका से भी वह संतुष्ट दिखे। उनका कहना है लखविंदर संग उनकी जोड़ी जम चुकी। लखविंदर के खाते में श्रोताओं की मोहब्बत आ रही है। वहीं, जूनियर वडाली लखविंदर अपना गुरू प्यारेलाल को बताते हैं। कहा, प्यारेलाल से उन्होंने बहुत कुछ सीखा। उनकी गायकी में उनका असर दिखाई पड़ता है। लखविंदर भी रैप जैसी नई विधाओं को चुनौतीपूर्ण मानते हैं। उन्होंने बताया प्यारेलाल वडाली की स्मृति में जल्द ही म्यूजिक एलबम रिलीज करने की तैयारी है। बता दें, वडाली बंधु के नाम से मशहूर यह जोड़ी प्यारेलाल एवं पूरनचंद के साथ बनी थी लेकिन, दो वर्ष पहले प्यारेलाल का निधन हो गया। उसके बाद पूरनचंद ने पुत्र लखविंदर को अपना जोड़ीदार बनाया।
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